‘सदन संदेश’ जनता और सदन के बीच संवाद का सशक्त सेतु बनने के साथ लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का बनेगी जीवंत दस्तावेज सरकार और विपक्ष, दोनों का समान दायित्व है कि वे जनहित को रखें सर्वोपरि - मुख्यमंत्री
‘सदन संदेश’ जनता और सदन के बीच संवाद का सशक्त सेतु बनने के साथ लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का बनेगी जीवंत दस्तावेज सरकार और विपक्ष, दोनों का समान दायित्व है कि वे जनहित को रखें सर्वोपरि - मुख्यमंत्री
खबर खास, चंडीगढ़ :
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मंगलवार को हरियाणा विधानसभा द्वारा प्रकाशित पत्रिका ‘सदन संदेश’का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने इसे विधानसभा द्वारा जनसंचार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि यह केवल पत्रिका का विमोचन नहीं, बल्कि नई सोच, नई दिशा और नए संकल्प का शुभारंभ है।
हरियाणा विधानसभा के प्रांगण में आयोजित इस कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण, संसदीय कार्य मंत्री महीपाल ढांडा, विधानसभा उपाध्यक्ष डॉ. कृष्ण लाल मिड्ढा, विधायक बी.बी. बत्रा सहित मंत्रीगण, विधायकगण और अधिकारीगण मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष और प्रकाशन से जुड़े सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि ‘सदन संदेश’ पत्रिका जनता और सदन के बीच संवाद का एक सशक्त सेतु बनेगा। यह पत्रिका न केवल विधानसभा की कार्यवाही, निर्णयों और विधायी प्रक्रियाओं को जनता तक पहुंचाने में मदद करेगी, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। पत्रिका के माध्यम से नागरिकों को सदन की गतिविधियों, नीतिगत चर्चाओं और महत्वपूर्ण विधायी पहलों की सुव्यवस्थित जानकारी प्राप्त होगी।
लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का जीवंत दस्तावेज बनेगी पत्रिका
सैनी ने कहा कि इस पत्रिका का उद्देश्य सदस्यों और पाठकों को उपयोगी जानकारी देना और विचारों की अभिव्यक्ति का मंच प्रदान करना है। यह पत्रिका हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों, विधायी परंपराओं और सदन की गरिमा को नई ऊर्जा देने का एक सशक्त माध्यम बनेगी। पत्रिका लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का एक जीवंत दस्तावेज है, जो शोधार्थियों, छात्रों और उन सभी नागरिकों के लिए भी मार्गदर्शिका बनेगी, जो लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को गहराई से समझना चाहते हैं।
जनता का विश्वास बनाए रखना जन-प्रतिनिधियों की सामूहिक जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत का लोकतंत्र विश्व का सबसे बड़ा और जीवंत लोकतंत्र है। इसकी असली ताकत केवल चुनावों में नहीं, बल्कि उस विश्वास में निहित है, जो जनता अपने प्रतिनिधियों पर करती है। जब एक आम नागरिक मतदान करता है, तो वह अपने सपनों, उम्मीदों और भरोसे को अपने जन-प्रतिनिधि के हाथों में सौंपता है। इसलिए, जनता का विश्वास बनाए रखना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की आत्मा हमारी विधायिकाओं में बसती है। संसद और राज्य विधानसभाएं वह स्थान हैं, जहां कानून बनते हैं, नीतियां तय होती हैं और कार्यपालिका की जवाबदेही सुनिश्चित होती है। सदन में होने वाली हर चर्चा, हर बहस और हर निर्णय का सीधा संबंध नागरिकों के जीवन से होता है। इसीलिए, हम सबका दायित्व है कि हम सदन में उपस्थित रहें। साथ ही, हम अध्ययन व शोध करें और जनता की भावनाओं को समझकर सार्थक एवं रचनात्मक बहस में भाग लें।
सरकार और विपक्ष, दोनों का समान दायित्व है कि वे जनहित को सर्वोपरि रखें
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी लोकतंत्र की मजबूती उसकी संवाद संस्कृति पर निर्भर करती है। मतभेद लोकतंत्र का स्वाभाविक और आवश्यक हिस्सा हैं, लेकिन, सरकार और विपक्ष, दोनों का समान दायित्व है कि वे जनहित को सर्वोपरि रखें और विचार-विमर्श की उस परंपरा को आगे बढ़ाएं, जो हमारी विधानसभा की पहचान है।
उन्होंने कहा कि सभा और समितियों की बैठकें, विधेयकों का अध्ययन, नीतियों का विश्लेषण, ये सभी विधायी कार्य जन-प्रतिनिधियों की निष्ठा को दर्शाते हैं। आज शोध-आधारित विधायी कार्यों की जरूरत पहले से बढ़ गई है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य की सिद्धि तभी संभव है, जब जनप्रतिनिधि अपनी भूमिका को गंभीरता से निभाएं, नीतियों को समझें और विकास की गति को तेज करने के लिए ठोस समाधान दें।
विधायी ढांचे को और अधिक सक्षम और आधुनिक बनाने के लिए हरियाणा विधानसभा द्वारा लगातार किए जा रहे प्रयास
मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष के कुशल नेतृत्व में हरियाणा विधानसभा इस दिशा में लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। सदन की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग, ई-विधान की सफलतापूर्वक शुरुआत, समितियों के कार्यों में पारदर्शिता और सदस्यों को प्रशिक्षण व अध्ययन भ्रमण की व्यवस्था की गई है। ये सभी प्रयास विधायी ढांचे को और अधिक सक्षम और आधुनिक बनाते हैं। इन्हीं उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए ‘सदन संदेश’ पत्रिका का प्रकाशन अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह विधायी गतिविधियों की जानकारी देगी। साथ ही, सदस्यों के विचारों, विश्लेषण और अनुभवों को पाठकों तक पहुंचाएगी।
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