केंद्र सरकार की कमजोर विदेश नीति ने भारत को ऊर्जा संकट और कूटनीतिक संबंधों में कड़वाहट की ओर धकेल दिया है: बैंस ईरान-अमेरिका-इज़राइल युद्ध के कारण होर्मुज़ जलडमरूमध्य मार्ग बंद होने से भारत में बड़े पैमाने पर एलपीजी और तेल की कमी हो गई है: कटारूचक्क
केंद्र सरकार की कमजोर विदेश नीति ने भारत को ऊर्जा संकट और कूटनीतिक संबंधों में कड़वाहट की ओर धकेल दिया है: बैंस ईरान-अमेरिका-इज़राइल युद्ध के कारण होर्मुज़ जलडमरूमध्य मार्ग बंद होने से भारत में बड़े पैमाने पर एलपीजी और तेल की कमी हो गई है: कटारूचक्क
खबर खास, चंडीगढ़ :
पंजाब विधानसभा ने आज सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें देश की विदेश नीति के संबंध में केंद्र सरकार की विफलता और देश की ऊर्जा सुरक्षा पर इसके नकारात्मक प्रभाव को उजागर किया गया। यह प्रस्ताव खाद्य, नागरिक आपूर्ति, उपभोक्ता मामले, वन तथा वन्यजीव संरक्षण मंत्री लाल चंद कटारूचक्क द्वारा प्रस्तुत किया गया। इस दौरान मंत्री लाल चंद कटारूचक्क ने कहा कि भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार की कमजोर विदेश नीति के कारण देश भर के लोगों को गंभीर ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ रहा है।
प्रस्ताव पर पुनः बहस की शुरुआत करते हुए कटारूचक्क ने भारत के स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा दी गई कुर्बानियों का उल्लेख किया और कहा कि जिस संप्रभुता के लिए उन्होंने अपने प्राण न्योछावर किए थे, उसे केंद्र सरकार की नीतियों ने कमजोर कर दिया है। मंत्री ने कहा,
“स्वतंत्रता सेनानियों ने देश को विदेशी साम्राज्यवादी शासन से मुक्त कराने के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी, लेकिन ईरान-अमेरिका-इज़राइल युद्ध के संदर्भ में भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने वही स्वतंत्रता अब अमेरिका को सौंप दी है।”
उन्होंने आगे कहा कि चल रहे संघर्ष के कारण होर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद हो गया है, जिससे भारत की ऊर्जा आपूर्ति में भारी व्यवधान पैदा हो गया है। कटारूचक्क ने कहा कि ईरान-अमेरिका-इज़राइल युद्ध के परिणामस्वरूप होर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद हो गया है, जिसके कारण भारत में एलपीजी और तेल की आपूर्ति में भारी कमी आ गई है और लोगों को गंभीर असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
इसी तरह शिक्षा, सूचना एवं लोक संपर्क मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि केंद्र सरकार की दिशाहीन विदेश नीति ने भारत की वैश्विक स्थिति को कमजोर कर दिया है और देश को कूटनीतिक रूप से अलग-थलग कर दिया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की दिशाहीन और आंतरिक रूप से नुकसानदेह विदेश नीति ने हालातों को इतनी खराब स्थिति में पहुंचा दिया है कि भारत लगभग अकेला पड़ गया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसका कोई मित्र नहीं रह गया है।
उन्होंने आगे कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी इसी तरह के हालात देखने को मिले थे। बैंस ने कहा कि उस दौरान भी भारत एक कठिन कूटनीतिक स्थिति में था।
संकट के आर्थिक प्रभावों को उजागर करते हुए हरजोत बैंस ने कहा कि रूस और ईरान जैसे देशों में तेल क्षेत्र में भारत के निवेश अब गंभीर अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि केवल इतना ही नहीं, बल्कि रूस और ईरान के तेल क्षेत्र में देश द्वारा किए गए बड़े निवेश से भी अब अपेक्षित लाभ मिलने की संभावना कम हो गई है।
उन्होंने यह भी बताया कि युद्ध के कारण पैदा हुए गंभीर ऊर्जा संकट ने देश भर के सामाजिक जीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि इस ऊर्जा संकट के कारण देश की जनता को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
कैबिनेट मंत्री तरुनप्रीत सिंह सौंद और हरदीप सिंह मुंडियां के साथ-साथ विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल, गुरिंदर सिंह गैरी वड़िंग, विजय सिंगला, ब्रह्म शंकर जिंपा, अमनशेर सिंह शैरी कलसी, मनविंदर सिंह ग्यासपुरा, बलकार सिंह, इंदरबीर सिंह निज्जर, गुरप्रीत सिंह बनांवाली और लालजीत सिंह भुल्लर ने भी चर्चा के दौरान इसी प्रकार के विचार व्यक्त किए और पंजाब विधानसभा में प्रस्तुत प्रस्ताव का समर्थन किया।
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