रंधावा ने चेताया- जरूरत पड़ने पर अदालत से लेकर संसद तक उठाएंगे कर्ज का मुद्दा अपने राजनीतिक फायदे के लिए आप सरकार ने पंजाब को साढ़े चार लाख करोड़ रुपए के कर्ज में डूबोया
रंधावा ने चेताया- जरूरत पड़ने पर अदालत से लेकर संसद तक उठाएंगे कर्ज का मुद्दा अपने राजनीतिक फायदे के लिए आप सरकार ने पंजाब को साढ़े चार लाख करोड़ रुपए के कर्ज में डूबोया
खबर खास, चंडीगढ़ :
पूर्व उपमुख्यमंत्री पंजाब और गुरदासपुर से सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार की आर्थिक नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि राज्य को लगातार कर्ज के जाल में फंसाया जा रहा है। महज तीन महीनों में लगभग 9500 करोड़ रुपए का कर्ज़ जुटाना सरकार की वित्तीय योजना की नाकामी को दर्शाता है। जिसके तहत अप्रैल में 4000 करोड़, मई में 3000 करोड़ और जून में 2500 करोड़ रुपए लिए जाएंगे। जिसमें से पहली किश्त 1500 करोड़ रुपए ले चुके हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार ने 2026-27 के लिए करीब 40 हजार करोड़ रुपए कर्ज लेने की योजना बना रखी है।
रंधावा ने कहा कि अगर यही स्थिति रही तो पंजाब आने वाले वर्षों में आर्थिक संकट की ओर बढ़ सकता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि राज्य के कर्ज़ और वित्तीय स्थिति पर तुरंत एक श्वेत पत्र जारी करे, ताकि जनता को पूरी सच्चाई पता चल सके। साथ ही उन्होंने चेताया पंजाब की जनता के भविष्य को अल्पकालिक राजनीति और गैर-जिम्मेदाराना आर्थिक फैसलों की भेंट नहीं चढ़ने दिया जाएगा और जरूरत पड़ने पर इस मुद्दे को अदालत का दरवाजा खटखाएंगे और इस मुद्दे को संसद तक उठाएंगे।
उन्होंने कहा कि पंजाब पहले से ही भारी कर्ज़ के बोझ तले दबा हुआ है। उपलब्ध वित्तीय आंकड़ों के अनुसार पंजाब पर कुल कर्ज़ 4 लाख करोड़ रुपए से भी अधिक हो चुका है। यदि इसी तरह कर्ज़ लेने का सिलसिला जारी रहा तो यह जल्द ही 4.47 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है।
रंधावा ने कहा कि पंजाब सरकार हर साल नए कर्ज़ लेकर पुराने कर्ज़ चुकाने की नीति पर चल रही है। नया लोन लेकर इसका बड़ा हिस्सा पुराने कर्ज़ और ब्याज चुकाने में ही खर्च किया जा रहा है। यह केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर पंजाब के लोगों पर पड़ रहा है।
आज पंजाब के हर व्यक्ति पर औसतन 1.25 लाख रुपए से अधिक का कर्ज़ है और आने वाले समय में यह बोझ और बढ़ेगा। पंजाब सरकार के बजट का बहुत बड़ा हिस्सा कर्मचारियों की तनख्वाह, पेंशन, बिजली सब्सिडी और पुराने कर्ज़ के ब्याज में ही चला जाता है। कई रिपोर्टों के अनुसार लगभग 90 प्रतिशत से अधिक बजट इन स्थायी खर्चों में ही खत्म हो जाता है, जिससे विकास कार्यों के लिए बहुत कम पैसा बचता है।
रंधावा ने यह भी कहा कि एफआरबीएम (फिजिकल रिस्पांसेबिल्टी एंड बजट मैनेजमेंट एक्ट राज्यों को वित्तीय अनुशासन में रखने के लिए बनाया गया है और इसके तहत कर्ज़ लेने की सीमाएं तय हैं। सरकार को इन सीमाओं का ध्यान रख कर ही कर्ज लेना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि पिछले कुछ महीनों में लिए गए हजारों करोड़ रुपये के कर्ज़ का इस्तेमाल आखिर किस विकास कार्य के लिए किया गया है। अगर यह पैसा केवल सब्सिडी और पुराने कर्ज़ चुकाने में ही खर्च हो रहा है, तो यह राज्य की वित्तीय स्थिति को और गंभीर संकट में डाल देगा।
पूर्व उपमुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि सरकार अल्पकालिक राजनीतिक लाभ के लिए बड़े-बड़े वादे कर रही है और उन वादों को पूरा करने के लिए लगातार कर्ज़ ले रही है। मुफ्त बिजली और अन्य सब्सिडी योजनाओं पर हर साल हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जिससे राज्य के खजाने पर भारी दबाव पड़ रहा है।
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