गवर्नर बोले—समय पर चुनाव संवैधानिक आवश्यकता, देरी से पैदा होगी अस्थिरता; चुनाव आयुक्त ने बंद लिफाफे में रिपोर्ट सौंपी
गवर्नर बोले—समय पर चुनाव संवैधानिक आवश्यकता, देरी से पैदा होगी अस्थिरता; चुनाव आयुक्त ने बंद लिफाफे में रिपोर्ट सौंपी
ख़बर ख़ास ,हिमाचल :
हिमाचल प्रदेश में प्रस्तावित पंचायत चुनावों को लेकर सरकार और प्रशासन के बीच उभरी मतभिन्नता अब राजभवन तक पहुंच गई है। राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने चुनावी तैयारियों को लेकर मंत्री और जिला प्रशासन के बीच हो रही विपरीत बयानबाजी पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने साफ कहा कि चुनाव समय पर होना संवैधानिक व्यवस्था है और इसमें किसी तरह की देरी पूरे राज्य में अस्थिरता पैदा कर सकती है।
राज्यपाल ने कहा कि एक तरफ मंत्री लगातार दावा कर रहे हैं कि पंचायत चुनाव समय पर ही होंगे, वहीं दूसरी ओर मंत्रियों के अधीन कार्य करने वाले सात जिलों के उपायुक्तों (DCs) ने आयोग को रिपोर्ट भेजी है कि मौजूदा परिस्थितियां चुनाव तैयारियों के अनुकूल नहीं हैं। उन्होंने कहा कि दोनों ही बातें एक साथ सही नहीं हो सकतीं, इसलिए मंत्री और अधिकारी आपस में समन्वय बनाएं और यह स्पष्ट करें कि प्रशासनिक व्यवस्था में कौन-सी बात अंतिम मानी जाए।
राज्यपाल ने कहा कि पंचायत चुनाव राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग का संयुक्त विषय है और दोनों को स्थिति स्पष्ट करनी होगी। उन्होंने चेताया कि संवैधानिक प्रणाली को बनाए रखने के लिए चुनाव समय पर होना जरूरी है, क्योंकि लोकतांत्रिक ढांचे में किसी भी प्रकार की देरी अव्यवस्था को जन्म देती है।
राजभवन में हुई मुलाकात के दौरान राज्य निर्वाचन आयुक्त अनिल खाची ने राज्यपाल को पंचायत चुनाव से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट सौंपी। यह रिपोर्ट बंद लिफाफे में दी गई है, जिसे राज्यपाल अध्ययन करेंगे। खाची ने उन्हें बताया कि पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव 31 जनवरी से पहले करवाना संवैधानिक बाध्यता है और इसके लिए आयोग अपनी तैयारियां पहले ही पूरी कर चुका है।
निर्वाचन आयुक्त ने जानकारी दी कि चुनावों के लिए मतदाता सूची तैयार हो चुकी है। इसके अलावा करीब 3 करोड़ बैलेट पेपर भी छपवा लिए गए हैं। आयोग ने पोलिंग स्टाफ, बूथ प्रबंधन और अन्य व्यवस्थाओं से संबंधित अधिकांश तैयारियां पूरी कर दी हैं। लेकिन, कई जिलों के निर्वाचन अधिकारी और डीसी आयोग के कुछ आदेशों की अनुपालना नहीं कर पाए हैं। खाची ने बताया कि सबसे बड़ी देरी आरक्षण रोस्टर के अंतिम रूप न मिलने से हो रही है, जिसके बिना अधिसूचना जारी करना संभव नहीं है।
राज्यपाल ने निर्देश दिया कि सरकार और आयोग समन्वय बनाकर जल्द से जल्द स्थिति स्पष्ट करें ताकि चुनावी प्रक्रिया में कोई बाधा न आए। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक पदाधिकारी और मंत्री दोनों प्रदेश की लोकतांत्रिक प्रणाली के संरक्षक हैं और उनसे समन्वय की ही अपेक्षा है।
राज्य में पंचायत चुनावों की तैयारियों को लेकर उभरी यह स्थिति अब राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है। सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग अगले चरण में क्या निर्णय लेते हैं और राज्यपाल की टिप्पणी के बाद सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती है।
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