सैनी ने संत गुरु रविदास जी की 649 वीं जयंती के राज्य स्तरीय कार्यक्रम को किया सम्बोधित
कुरुक्षेत्र के उमरी में 5 एकड़ भूमि पर 124 करोड़ रुपए से किया जाएगा गुरु रविदास धाम का निर्माण, 90 करोड़ रुपए के कामों के टेंडर किए जारी
20 वर्षों से एक स्थान पर रहने वाले अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लोगों को पॉलिसी बनाकर दिया जाएगा मालिकाना हक: मुख्यमंत्री
खबर खास, चंडीगढ़ :
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने घोषणा की हैं कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति के जो लोग 20 साल से एक स्थान पर निवास कर रहे है, उन्हें मालिकाना हक देने के लिए पॉलिसी बनाकर रियायत दी जाएगी। इसके अलावा एससी कम्पोनेंट प्लान के पैसों को एससी समाज के लिए ही प्रयोग करने के लिए सत्र में प्रावधान लाकर लागू किया जाएगा।
मुख्यमंत्री शनिवार को कुरुक्षेत्र के उमरी में हरियाणा सरकार की संत महापुरुष सम्मान एवं विचार प्रचार प्रसार योजना के अंतर्गत आयोजित संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की 649वीं जयंती पर राज्य स्तरीय समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस बीच कार्यक्रम संयोजक एवं प्रदेश के विकास एवं पंचायत मंत्री तथा खनन एवं भू-विज्ञान मंत्री कृष्ण लाल पंवार द्वारा रखी गई मांगों पर बोलते हुए कहा कि औद्योगिक व व्यावसायिक प्रयोग के लिए एचएसआईआईडीसी में पॉलिसी बनाकर छूट का प्रावधान भी किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुसूचित जाति की नौकरियों की क्लास ए व बी में पदोन्नति व क्रीमीलेयर के मापदंडों को 31 मार्च 2026 तक निर्धारित किया जाना है, इसके लिए सुझाव प्रस्तुत किए जाएं, उन सुझावों के आधार पर मांग को पूरा किए जाने की कोशिश की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने इससे पहले कार्यक्रम में पहुंचने पर संत शिरोमणि गुरु रविदास जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन भी किया। वहीं, कार्यक्रम में मौजूद संत समाज से भी मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने आर्शीवाद लिया।
सैनी ने अपने संबोधन में संत शिरोमणि गुरु रविदास जी को नमन करते हुए कहा कि गुरु रविदास का व्यक्तित्व पूर्णिमा के चन्द्रमा की तरह शीतल एवं उज्ज्वल था। उनकी वाणी, उनके आदर्श और उनकी शिक्षाएं अजर-अमर हैं। वे केवल अपने युग के संत नहीं थे, बल्कि हर युग के लिए मानवता के मार्गदर्शक हैं। उन्होंने अपनी काव्य रचनाओं में सरल और व्यावहारिक भाषा का प्रयोग करके आमजन तक अपने विचार पहुंचाए। उन्होंने भक्ति आंदोलन से समाज सुधार करने का साहसिक और ऐतिहासिक काम किया, जिससे उस समय जाति-पाति, अंधविश्वास और ऊंच-नीच में उलझे समाज में एक नई जागृति आई। संत रविदास जी किसी एक जाति या सम्प्रदाय के गुरु नहीं थे। वे पूरी मानव जाति के पथ-प्रदर्शक थे।
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