भूमि विवाद और कथित धोखे से जुड़ा मामला, पुलिस जांच में गैंगस्टर कनेक्शन और मिडलमैन की भूमिका सामने आई
भूमि विवाद और कथित धोखे से जुड़ा मामला, पुलिस जांच में गैंगस्टर कनेक्शन और मिडलमैन की भूमिका सामने आई
खबर खास | चंडीगढ़
चंडीगढ़ पुलिस ने पंजाब भाजपा से जुड़ी अमरीन राय को प्रॉपर्टी डीलर चमनप्रीत सिंह उर्फ चिन्नी कूब्बाहेड़ी की दो महीने पहले हुई हत्या की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि राय पिछले दो सालों से पंजाब भाजपा से सक्रिय रूप से जुड़ी थीं और सामाजिक कार्यों के लिए भी जानी जाती थीं। पुलिस सूत्रों के अनुसार उनका संबंध पंजाब के एक वरिष्ठ ADGP से भी बताया जा रहा है।
पुलिस जांच के मुताबिक, अमरीन राय ने जमीन विवाद को लेकर बंबीहा गैंग के गैंगस्टर लकी पातियाल को ₹50 लाख की सुपारी देकर हत्या को अंजाम दिलवाया। शुरुआत में यह सौदा ₹1 करोड़ में तय हुआ था, लेकिन बाद में इसे ₹50 लाख पर फाइनल किया गया।
पूछताछ के दौरान राय ने बताया कि उन्हें चमनप्रीत सिंह पर प्रॉपर्टी डील में धोखाधड़ी का शक था। आरोप है कि उन्होंने जमीन को अधिक कीमत पर बेचा और कब्जा नहीं दिया, जिससे उन्हें भारी वित्तीय नुकसान हुआ। यही शक आगे चलकर गहरी रंजिश और हत्या की साजिश में बदल गया।
दोनों के बीच संबंध लगभग तीन साल पहले शुरू हुए थे, जब राय की मुलाकात चमनप्रीत से उनके बेटे के जरिए हुई थी, जो सेक्टर 9 के एक जिम में वर्कआउट करता था। चमनप्रीत, जो एक प्रॉपर्टी डीलर थे, ने राय को रियल एस्टेट में निवेश करने में मदद की थी। शुरुआती सौदा लाभदायक रहा, जिसके बाद आगे भी निवेश किया गया, जिसमें फतेहपुर तप्परियां की बड़ी जमीन डील शामिल थी।
चमनप्रीत के भाई दीप इंदर के अनुसार, राय ने पहले की डील्स में मुनाफा कमाया था, जिसमें न्यू चंडीगढ़ की प्रॉपर्टी भी शामिल है। विवादित डील में राय को लगभग 34 कनाल 8 मरला जमीन दी गई थी। यह सौदा कानूनी रूप से पूरा और लाभदायक था, लेकिन बाद में किसी के भड़काने पर राय को गलतफहमी हुई कि उनके साथ धोखा हुआ है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, वित्तीय समझौता पूरा होने के बावजूद राय के मन में रंजिश बनी रही। जांच में सामने आया कि मोहाली के काइमबाला गांव के प्रॉपर्टी डीलर हरप्रीत सिंह ने राय और गैंगस्टर लकी पातियाल के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई। उसने एन्क्रिप्टेड ऐप के जरिए दोनों के बीच संपर्क स्थापित कराया।
इसके बाद पातियाल ने दो शूटरों रंजन उर्फ पीयूष पहलवान और प्रीतम को तैयार किया और उन्हें हथियार, भागने के लिए मोटरसाइकिल और अन्य संसाधन उपलब्ध कराए। 18 मार्च को शूटरों ने जिम के बाहर रेकी की।
जैसे ही चमनप्रीत सिंह जिम से बाहर निकले, हमलावरों ने उन पर गोली चला दी और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। इसके बाद आरोपी पहले से तय रास्ते से फरार हो गए। पूरी वारदात पहले से योजनाबद्ध थी।
इस केस में बड़ा मोड़ 29 अप्रैल को आया, जब क्राइम ब्रांच ने टिप-ऑफ के आधार पर हरप्रीत सिंह को मलोया के एक सत्संग भवन के पास से गिरफ्तार किया। उसके पास से एक विदेशी .45 बोर पिस्तौल और दो जिंदा कारतूस बरामद हुए, जिसके बाद कई अहम खुलासे हुए।
पुलिस अब इस साजिश से जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है और अन्य संभावित आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है।
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