शानन प्रोजेक्ट का स्वामित्व लौटाने की मांग भी रखेंगे सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू
शानन प्रोजेक्ट का स्वामित्व लौटाने की मांग भी रखेंगे सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू
खबरखास, हिमाचल :
फरीदाबाद में शनिवार को आयोजित होने जा रही उत्तर क्षेत्रीय परिषद की बैठक में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू राज्य के कई महत्वपूर्ण मुद्दों को केंद्र सरकार के समक्ष रखने वाले हैं। यह बैठक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में होगी, जिसमें उत्तरी राज्यों से जुड़े विभिन्न लंबित मामलों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। सीएम सुक्खू शुक्रवार शाम ही फरीदाबाद पहुंच गए हैं और आज की बैठक में हिमाचल से जुड़े लंबित विवादों को मजबूती से उठाने की तैयारी कर चुके हैं।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री बीबीएमबी (भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड) के पास लंबित हिमाचल प्रदेश के 4,000 करोड़ रुपये से अधिक के एरियर के भुगतान का मुद्दा प्रमुखता से उठाएंगे। प्रदेश सरकार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बावजूद बीबीएमबी की ओर से भुगतान नहीं किया जा रहा है। इस मसले को हिमाचल सरकार पहले भी कई बार केंद्र के सामने रख चुकी है, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। सीएम सुक्खू उम्मीद कर रहे हैं कि इस बार उत्तर क्षेत्रीय परिषद के मंच के माध्यम से केंद्र सरकार इस दिशा में निर्णायक कदम उठाएगी।
इसके साथ ही बैठक में चंडीगढ़ में हिमाचल प्रदेश की 7.19% वैधानिक हिस्सेदारी का मुद्दा भी उठाया जाएगा। प्रदेश सरकार का कहना है कि विभिन्न साझा परिसंपत्तियों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं में हिमाचल की उचित हिस्सेदारी को लेकर वर्षों से स्पष्टता नहीं दी गई है। मुख्यमंत्री इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा करने और केंद्र से हस्तक्षेप की मांग करेंगे ताकि हिमाचल को उसका वैधानिक हक मिल सके।
एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा शानन प्रोजेक्ट का है, जिसे लेकर हिमाचल प्रदेश लंबे समय से स्वामित्व का दावा करता आ रहा है। ब्रिटिशकाल में 1920 के दशक में 99 साल की लीज पर दिए गए इस प्रोजेक्ट की अवधि अब लगभग समाप्त होने वाली है। हिमाचल सरकार चाहती है कि इस परियोजना का स्वामित्व पूरी तरह वापस उसे सौंपा जाए। मुख्यमंत्री सुक्खू इस मुद्दे को भी बैठक में विस्तार से पेश करेंगे और पंजाब सरकार व केंद्र से इस पर सकारात्मक निर्णय की अपेक्षा जताएंगे।
उत्तर क्षेत्रीय परिषद की यह बैठक हिमाचल प्रदेश के लिए काफी अहम मानी जा रही है क्योंकि यहां उठाए जाने वाले मुद्दे राज्य के वित्त, ऊर्जा संसाधनों और प्रशासनिक अधिकारों से सीधे तौर पर जुड़े हैं। मुख्यमंत्री की ओर से उठाए गए प्रस्तावों पर क्या निर्णय होता है, यह आने वाले दिनों में प्रदेश की नीति और संसाधन प्रबंधन की दिशा तय करेगा।
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