विशेष सत्र को ‘आप’ सरकार की एक अन्य नाटकीय पेशकश बताया उठाए सवाल- 4 साल बाद भी दोषियों को सजा देने में क्यों नाकाम रही सरकार बोले, भाजपा की सरपरस्ती में ‘आप’ और अकालियों के बीच “खुला समझौता”
विशेष सत्र को ‘आप’ सरकार की एक अन्य नाटकीय पेशकश बताया उठाए सवाल- 4 साल बाद भी दोषियों को सजा देने में क्यों नाकाम रही सरकार बोले, भाजपा की सरपरस्ती में ‘आप’ और अकालियों के बीच “खुला समझौता”
खबर खास, चंडीगढ़ :
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने कहा है कि 13 अप्रैल को बेअदबी के मामलों के खिलाफ नया कानून बनाने के लिए बुलाया गया विशेष सत्र सिर्फ आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा अपनी नाकामियों को छुपाने की कोशिश है, क्योंकि 4 साल सत्ता में रहने के बावजूद वह दोषियों को सजा नहीं दिला सकी है।
उन्होंने सवाल उठाया कि बेअदबी और बाद में प्रदर्शनकारियों की हत्या के लिए जिम्मेदार लोगों को सजा देने में सरकार क्यों विफल रही। उन्होंने कहा कि यह विशेष सत्र भी ‘आप’ की एक और नाटकीय प्रस्तुति होगा, जिसमें शोर-शराबा तो होगा, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘आप’ सरकार मुश्किल हालात से बचने के लिए बार-बार विशेष सत्रों का सहारा लेती रही है।
उन्होंने कहा कि अगर आम आदमी पार्टी सरकार की नीतियां वास्तव में सच्ची होतीं, तो वह इस तरह का कानून तैयार करने से पहले संबंधित पक्षों, विद्वानों और कानूनी विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श करती। यह कानून न केवल पंजाबी समुदाय के लिए भावनात्मक और संवेदनशील महत्व रखता है, बल्कि इसके लंबे भविष्य पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं।
वड़िंग ने कहा कि इस मामले में ‘आप’ और शिरोमणि अकाली दल के बीच भाजपा की सरपरस्ती में “खुला समझौता” है। उन्होंने पूछा कि अगर अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने श्री अकाल तख्त साहिब के सामने अपनी गलती स्वीकार की थी, तो ‘आप’ सरकार ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की।
उन्होंने ‘आप’ नेतृत्व, खासकर इसके प्रमुख अरविंद केजरीवाल को याद दिलाया कि 2022 विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने दावा किया था कि बेअदबी के दोषियों को 24 घंटे में सजा दी जाएगी। लेकिन चार साल बीत जाने के बावजूद आरोपी अभी भी खुलेआम घूम रहे हैं।
वड़िंग ने कहा कि सिर्फ कानून बनाने से डर पैदा नहीं होता, जब तक दोषियों को सजा न मिले। उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर सक्रिय रहे कुंवर विजय प्रताप सिंह को भी पार्टी में किनारे कर दिया गया है और वे इस्तीफे के कगार पर हैं।
भाजपा पर निशाना साधते हुए, उन्होंने पूछा कि केंद्र सरकार ने 2016 में पंजाब विधानसभा द्वारा सर्वसम्मति से पारित सख्त बेअदबी विरोधी कानून को अब तक अधिसूचित क्यों नहीं किया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि ‘आप’ सरकार ने इस मुद्दे को केंद्र के साथ आगे क्यों नहीं बढ़ाया। ऐसे में क्या गारंटी है कि नया कानून भी उसी तरह अधर में नहीं लटक जाएगा।
उन्होंने कहा कि जैसे 2016 में अकाली सरकार ने अपने कार्यकाल के अंत में ऐसा कानून लाया था, उसी तरह अब ‘आप’ सरकार भी अपने कार्यकाल के आखिरी चरण में यह कदम उठा रही है।
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