राज्यपाल ने दिया स्वाभाविक स्वरूप में रहकर आधुनिक होने पर बल
राज्यपाल ने दिया स्वाभाविक स्वरूप में रहकर आधुनिक होने पर बल
खबर खास, शिमला :
राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने कहा कि मौजूदा परिप्रेक्ष्य में आधुनिकीकरण आवश्यक है लेकिन अति किसी चीज के लिए नहीं होनी चाहिए क्योंकि अति आधुनिक होना अपने स्वाभाविक स्थिति को खोना है। उन्होंने कहा कि आधुनिक होना जरूर है लेकिन अपने स्वाभाविक वृद्धि में अपने स्वाभाविक स्वरूप में रहकर के ही आधुनिक होना चाहिए।
राज्यपाल आज यहां राजकीय कन्या महाविद्यालय (आर.के.एम.वी.), शिमला के वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित हुए। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए कॉलेज की सराहना करते हुए कहा कि यह महाविद्यालय केवल ज्ञान का केंद्र ही नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण का प्रकाश-स्तंभ है। उन्होंने कहा कि यहाँ की छात्राओं ने अकादमिक उपलब्धियों के साथ-साथ खेल, संस्कृति, शोध, एन.सी.सी., एन.एस.एस. और विभिन्न सामाजिक अभियानों में अद्वितीय प्रदर्शन किया है।
श्री शुक्ल ने कहा, ‘‘भारत आज नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है, और इस प्रगति की धुरी हमारी बेटियाँ ही हैं। जहाँ नारी का सम्मान और सामर्थ्य बढ़ता है, वही समाज और राष्ट्र उन्नति करता है। उन्होंने कहा कि इस कॉलेज की छात्राएँ शिक्षा के साथ-साथ नेतृत्व, विज्ञान, कला, तकनीक और प्रशासन के क्षेत्रों में जिस प्रकार आगे बढ़ रही हैं, वह प्रदेश के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने छात्राओं से अपील की कि वे नई तकनीकों को सीखें, नवाचार और अनुसंधान को अपनाएँ, पर्यावरण संरक्षण की भावना से कार्य करें, और सबसे महत्वपूर्ण-अपने मूल्यों, संवेदनाओं और सामाजिक जिम्मेदारियों को सदैव अखंड बनाए रखें।
उन्होंने कहा कि कुश नेतृत्व के कारण आज देश प्रगति के मार्ग पर अग्रसर है। उन्होंने रूस के राष्ट्रपति द्वारा दिए गए वक्तव्य कि ‘‘भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जो सोचते हैं उसे करके रहते हैं’’ पर कहा कि भारतवासियों को अपने ऐसे नेता पर अति विश्वास करके भी चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्र प्रथम हमारा पहला उद्देश्य होना चाहिये। देश सुरक्षित होगा तभी हम सुरक्षित हैं।
राज्यपाल ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह महाविद्यालय युवा रेडक्रॉस में प्रदेश का एकमात्र विधिवत् पंजीकृत कॉलेज है। इससे स्पष्ट होता है कि यह संस्थान न केवल शिक्षा प्रदान करता है, बल्कि मानवता, सेवा-भाव, करुणा और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे मूल्यों को भी विद्यार्थियों के भीतर गहराई से स्थापित करता है। उन्होंने कॉलेज प्रशासन और छात्राओं की सराहना की कि उन्होंने नशा-निवारण के लिए कई प्रभावी कार्य किए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘यहाँ की छात्राएँ और संकाय सदस्य नशे के दुष्प्रभावों के प्रति समाज को जागरूक करने के लिए नियमित अभियान चलाते हैं, संवाद करते हैं तथा युवाओं को सकारात्मक दिशा देने के लिए मार्गदर्शन गतिविधियों से जुड़े हैं। महाविद्यालय का एंटी-ड्रग अभियान सदैव सक्रिय और प्रभावशाली रहा है।’’
उन्होंने कहा कि कॉलेज द्वारा संचालित ‘‘एंटी-चिट्टा अभियान’’ विशेष रूप से सराहनीय है। वर्तमान में, हिमाचल प्रदेश के सामने ‘चिट्टा’ जैसी जो भयावह चुनौती है, उसके विरुद्ध आर.के.एम.वी. की पहल पूरे समाज के लिए एक प्रेरक संदेश है। उन्होंने कहा कि ऐसी संवेदनशील पहलें बताती हैं कि यह महाविद्यालय शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी को भी गंभीरता से निभा रहा है। उन्होंने छात्राओं द्वारा नशे के खिलाफ नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति की भी सराहना की।
राज्यपाल ने कहा कि कॉलेज ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप अपने आप को एक आदर्श महाविद्यालय के रूप में विकसित किया है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह कॉलेज जनजातीय क्षेत्रों से आने वाली बेटियों के लिए एक सशक्त मंच के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा कि यह प्रयास ‘‘समावेशी शिक्षा’’ का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो एक सभ्य, संतुलित और गर्वीले समाज की नींव रखता है।
आर.के.एम.वी. की प्रधानाचार्य डॉ अनुरीता सक्सेना ने राज्यपाल का स्वागत किया तथा कॉलेज की वार्षिक रिपोर्ट पढ़ी।
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