ये अनुदान आईसीएसएसआर की शोध परियोजना योजनाओं के अंतर्गत स्वीकृत किए गए हैं, जिनका उद्देश्य समकालीन सामाजिक चुनौतियों पर उच्च गुणवत्ता वाले सामाजिक विज्ञान शोध को बढ़ावा देना है।
ये अनुदान आईसीएसएसआर की शोध परियोजना योजनाओं के अंतर्गत स्वीकृत किए गए हैं, जिनका उद्देश्य समकालीन सामाजिक चुनौतियों पर उच्च गुणवत्ता वाले सामाजिक विज्ञान शोध को बढ़ावा देना है।
खबर खास, बठिंडा:
पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयू पंजाब) के आठ प्राध्यापकों को भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर) द्वारा कुल प्रतिष्ठित शोध अनुदान के रूप में ₹1.07 करोड़ की राशि हेतु स्वीकृति प्राप्त हुई है। यह उपलब्धि कुलपति प्रो. राघवेंद्र प्रसाद तिवारी के मार्गदर्शन में हासिल हुई है। ये अनुदान आईसीएसएसआर की शोध परियोजना योजनाओं के अंतर्गत स्वीकृत किए गए हैं, जिनका उद्देश्य समकालीन सामाजिक चुनौतियों पर उच्च गुणवत्ता वाले सामाजिक विज्ञान शोध को बढ़ावा देना है।
अनुदान प्राप्त करने वाले प्राध्यापकों में डॉ. रेनु शर्मा (भूगोल विभाग), डॉ. प्रीतम चंद (भूगोल विभाग), डॉ. शाहिला जफर (अंग्रेज़ी विभाग), डॉ. बली बहादुर (समाजशास्त्र विभाग), डॉ. स्मृति राय (विधि विभाग), डॉ. सुखदेव सिंह (पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग), डॉ. लालमंगाईही छकछुआक (समाजशास्त्र विभाग) तथा डॉ. एल.टी. ससांग गुइटे (भूगोल विभाग) शामिल हैं।
स्वीकृत शोध परियोजनाएं सामाजिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित हैं। इनमें जनजातीय कल्याण, संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्रों में सतत पर्यटन, डिजिटल संस्कृति एवं पहचान, प्रवासी समुदायों का योगदान, जलवायु परिवर्तन से प्रेरित प्रवासन तथा ज्ञान के प्रलेखन जैसे क्षेत्र शामिल हैं। प्रमुख शोध क्षेत्रों में विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों पर पीएम-जनमन योजना के प्रभावों का अध्ययन, आपदा-संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों में सतत पर्यटन अवसंरचना का विकास, भाषाई संकरता, पहचान एवं डिजिटल संस्कृति का विश्लेषण, रविदासिया प्रवासी समुदाय के पंजाबी समाज में योगदान का मानचित्रण, भारत में जलवायु-प्रेरित प्रवासन एवं तटीय संकटों का अध्ययन, श्री गुरु तेग बहादुर से संबंधित साहित्य का पंजाबी, हिंदी एवं अंग्रेज़ी में प्रलेखन, मातृ स्वास्थ्य सशक्तिकरण, तथा मिजोरम एवं मेघालय में स्वास्थ्य निर्धारकों, परिणामों और स्वास्थ्य संसाधनों का स्थानिक विश्लेषण शामिल हैं।
इस उपलब्धि पर प्राध्यापकों को बधाई देते हुए कुलपति प्रो. राघवेंद्र प्रसाद तिवारी ने कहा कि यह सफलता विश्वविद्यालय की सुदृढ़ होती शोध क्षमता और शैक्षणिक जीवंतता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएं सामाजिक रूप से प्रासंगिक मुद्दों पर अंतर्विषयक शोध को बढ़ावा देने के साथ-साथ नीतिगत निर्माण, सुशासन एवं सामुदायिक हस्तक्षेपों के लिए साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण विकसित करने की विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। विषयों की व्यापकता ‘विकसित भारत’ की परिकल्पना के अनुरूप प्रभावी, उपयोगी और नीतिपरक शोध के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को और अधिक सुदृढ़ करती है।
सम कुलपति प्रो. किरण हजारिका ने भी सभी चयनित प्राध्यापकों को हार्दिक बधाई देते हुए उन्हें उच्च गुणवत्ता वाले शोध कार्य के लिए प्रेरित किया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इन परियोजनाओं से सार्थक एवं समाजोपयोगी निष्कर्ष सामने आएंगे तथा उच्च प्रभाव वाले शोध पत्रिकाओं में प्रकाशन के अवसर बढ़ेंगे।
निदेशक (अनुसंधान एवं विकास) प्रो. अंजना मुंशी ने कहा कि इस प्रकार की बाह्य वित्तपोषित परियोजनाएं विश्वविद्यालय के शोध पारिस्थितिकी तंत्र को और अधिक सुदृढ़ बनाती हैं तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सार्थक सहयोग के नए आयाम खोलती हैं।
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