पंजाब के आठ जिलों के कुल 450 बच्चों ने अपने 16 नोडल शिक्षकों और सांझ केंद्र के 16 कर्मचारियों के साथ इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
पंजाब के आठ जिलों के कुल 450 बच्चों ने अपने 16 नोडल शिक्षकों और सांझ केंद्र के 16 कर्मचारियों के साथ इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
खबर खास, चंडीगढ़ :
स्कूली विद्यार्थियों में ज़िम्मेदार नागरिकता, बेहतर अनुशासन और व्यक्तित्व निर्माण की भावना को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से पंजाब पुलिस और शिक्षा विभाग की संयुक्त पहल स्टूडेंट पुलिस कैडेट (एसपीसी) स्कीम के तहत विद्यार्थियों के लिए महाराजा रणजीत सिंह पंजाब पुलिस अकादमी, फिल्लौर का एक दिवसीय भ्रमण आयोजित किया गया।
पंजाब के आठ जिलों के कुल 450 बच्चों ने अपने 16 नोडल शिक्षकों और सांझ केंद्र के 16 कर्मचारियों के साथ इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
एसपीसी कार्यक्रम के बारे में और जानकारी देते हुए स्पेशल डीजीपी, कम्युनिटी अफेयर्स डिवीज़न (सीएडी) गुरप्रीत कौर दियो ने कहा कि यह योजना पुलिस और युवाओं के बीच एक पुल का कार्य करते हुए विश्वास, जागरूकता और सामाजिक ज़िम्मेदारी की संस्कृति को बढ़ावा देती है।
उन्होंने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत डीएसपी सीएडी प्रभजोत कौर द्वारा एसपीसी स्कीम के बारे में जानकारी प्रदान करने के साथ हुई, जिसके बाद सलाहकार, पीपीए फिल्लौर, रवचरण सिंह ने एक प्रस्तुति दी। उन्होंने विद्यार्थियों को महाराजा रणजीत सिंह पंजाब पुलिस अकादमी के इतिहास और महत्व के बारे में अवगत कराते हुए उन्हें पंजाब की विरासत से जोड़ा।
इसके पश्चात एसपी साइबर क्राइम एसएएस नगर मनोज गोरसी, डीएसपी सीएडी परमिंदर सिंह बराड़, डीएसपी सीएडी प्रभजोत कौर और सलाहकार, पीपीए फिल्लौर, रवचरण सिंह के साथ एक बातचीत सत्र करवाया गया। सत्र के दौरान नोडल शिक्षकों ने विभिन्न मुद्दों को उठाते हुए पुलिस अधिकारियों से कैडेटों की वर्दी और स्वतंत्रता दिवस व गणतंत्र दिवस समारोहों में उनकी भागीदारी संबंधी दिशानिर्देश जारी करने का अनुरोध किया।
विचार-विमर्श के बाद एसपी मनोज गोरसी द्वारा साइबर जागरूकता पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी गई। उन्होंने विद्यार्थियों को सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार, सकारात्मक डिजिटल उपस्थिति और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा के महत्व के बारे में जागरूक किया।
सत्र में ऑनलाइन उत्पीड़न/परेशानी, वित्तीय धोखाधड़ी, ऑनलाइन गेमिंग जोखिम और मोबाइल उपकरणों के ज़िम्मेदार उपयोग जैसे प्रमुख विषयों पर भी चर्चा हुई। इस दौरान वास्तविक जीवन के उदाहरणों और पारस्परिक प्रश्नोत्तर के माध्यम से बच्चों को डिजिटल दुनिया में सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि की तुरंत रिपोर्ट करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। प्रस्तुति का उद्देश्य विद्यार्थियों को सुरक्षित और जिम्मेदारी के साथ इंटरनेट के उपयोग के संबंध में आवश्यक जानकारी प्रदान करना था।
इसके बाद विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए अकादमी के अध्ययन-भ्रमण का भी प्रबंध किया गया, जिसके दौरान बच्चों को उस ऐतिहासिक किले की विशिष्ट वास्तुकला के बारे में जानकारी दी गई, जहाँ यह अकादमी स्थित है। विद्यार्थियों ने अकादमी के भीतर स्थित पंजाब राज्य फिंगरप्रिंट ब्यूरो का भी दौरा किया, जहाँ उन्हें विभिन्न फोरेंसिक और फिंगरप्रिंट-संबंधित प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी प्रदान की गई।
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