स्कूल फीस भरने में संघर्ष से लेकर केhelo इंडिया बीच गेम्स 2026 में महाराष्ट्र टीम के सहायक कोच बनने तक, कोल्हापुर के अक्षय पाटिल की कहानी बताती है कि पारंपरिक खेल कैसे जीवन बदल सकता है।
स्कूल फीस भरने में संघर्ष से लेकर केhelo इंडिया बीच गेम्स 2026 में महाराष्ट्र टीम के सहायक कोच बनने तक, कोल्हापुर के अक्षय पाटिल की कहानी बताती है कि पारंपरिक खेल कैसे जीवन बदल सकता है।
ख़बर ख़ास, खेल :
कोल्हापुर के अक्षय पाटिल ने रस्साकशी के ज़रिए अपनी ज़िंदगी को नई दिशा दी है। एक छोटे किसान परिवार में जन्मे अक्षय का बचपन आर्थिक तंगी में बीता, लेकिन पारंपरिक खेल रस्साकशी उनके लिए उम्मीद और स्थिरता का सहारा बन गया।
अक्षय ने अपने स्कूल के दिनों में रस्साकशी खेलना शुरू किया। जिला स्तर पर चयन उनके लिए सिर्फ खेल उपलब्धि नहीं था, बल्कि जीवन बदलने वाला मौका साबित हुआ। चयन के बाद स्कूल ने उनकी सालाना 1,200 रुपये की ट्यूशन फीस माफ कर दी, जिससे परिवार पर पड़ा आर्थिक बोझ काफी कम हुआ। इसी क्षण से अक्षय ने खेल को गंभीरता से अपनाने का फैसला किया।
पढ़ाई के साथ-साथ लगातार अभ्यास करते हुए अक्षय ने जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लिया। उनकी मेहनत और लगन का फल वर्ष 2021 में मिला, जब उन्हें खेल कोटे के तहत डाक विभाग में सॉर्टिंग असिस्टेंट के पद पर सीधी भर्ती मिली। शुरुआती पोस्टिंग भले ही घर से दूर रही, लेकिन बाद में कोल्हापुर स्थानांतरण होने से परिवार को स्थायित्व मिला।
नौकरी मिलने के बाद अक्षय ने अपनी इकलौती बहन की शादी करवाई और पशुधन में निवेश कर माता-पिता के लिए एक छोटा डेयरी व्यवसाय शुरू कराया। जीवन भर खेतों में मेहनत करने वाले माता-पिता के लिए यह एक बड़ा सहारा साबित हुआ और परिवार आर्थिक रूप से सुरक्षित हुआ।
सरकारी स्कूल से पढ़े अक्षय का खेल रिकॉर्ड भी प्रभावशाली है। उन्होंने 2012 में चेन्नई में आयोजित जूनियर वर्ल्ड कप में रजत पदक जीता। इसके अलावा 2011 से 2022 के बीच सीनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप में दो स्वर्ण, चार रजत और तीन कांस्य पदक अपने नाम किए। सरकारी सेवा में आने के बाद भी उन्होंने अभ्यास और प्रतियोगिताओं से दूरी नहीं बनाई।
वर्तमान में 29 वर्षीय अक्षय पाटिल केhelo इंडिया बीच गेम्स 2026 में महाराष्ट्र की रस्साकशी टीम के सहायक कोच हैं। वे अपने सफर का श्रेय पूर्व राष्ट्रीय भारोत्तोलक और रस्साकशी खिलाड़ी माधवी पाटिल को देते हैं, जो अब कोच और शारीरिक शिक्षा शिक्षिका के रूप में युवाओं को मार्गदर्शन दे रही हैं।
केhelo इंडिया जैसी पहलों से रस्साकशी को नई पहचान मिल रही है। अक्षय पाटिल की कहानी इस बात का सशक्त उदाहरण है कि खेल न केवल व्यक्तिगत जीवन बदल सकता है, बल्कि पूरे परिवार को सम्मान, रोज़गार और सुरक्षित भविष्य भी दे सकता है।
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