पांच शतकों के साथ रिकॉर्ड की बराबरी, विदर्भ को लगातार दूसरी बार फाइनल तक पहुंचाने में अहम भूमिका
पांच शतकों के साथ रिकॉर्ड की बराबरी, विदर्भ को लगातार दूसरी बार फाइनल तक पहुंचाने में अहम भूमिका
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विदर्भ के दाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज अमन मोखाडे के लिए यह सीजन बेहद यादगार साबित हो रहा है। विजय हजारे ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन करते हुए मोखाडे ने अपनी टीम को लगातार दूसरी बार फाइनल में पहुंचाने में निर्णायक भूमिका निभाई है। रविवार को बेंगलुरु स्थित बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ग्राउंड पर होने वाले फाइनल मुकाबले में विदर्भ का सामना सौराष्ट्र से होगा, जहां एक बार फिर मोखाडे से बड़ी पारी की उम्मीद रहेगी।
कर्नाटक के खिलाफ सेमीफाइनल मुकाबले में शतक जड़ते हुए मोखाडे ने एक ही संस्करण में सबसे ज्यादा शतकों के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली। टूर्नामेंट में अब तक उनके नाम पांच शतक दर्ज हैं। उन्होंने 97.62 की औसत से 781 रन बनाकर खुद को प्रतियोगिता का सर्वाधिक रन बनाने वाला बल्लेबाज बना लिया है। इसके साथ ही मोखाडे ने सिर्फ 16 पारियों में 1000 लिस्ट-ए रन पूरे कर दक्षिण अफ्रीका के दिग्गज ग्रेम पोलक के विश्व रिकॉर्ड की भी बराबरी की और यह उपलब्धि हासिल करने वाले सबसे तेज भारतीय बल्लेबाज बने।
मोखाडे के करियर में यह उछाल ऐसे समय आया है जब वह लंबे समय तक विदर्भ की मजबूत बल्लेबाजी लाइन-अप में मौके का इंतजार कर रहे थे। अथर्व तायडे, ध्रुव शोरी, यश राठौड़, करुण नायर और दानिश मलेवार जैसे खिलाड़ियों की मौजूदगी में उन्हें सीमित अवसर मिले। लेकिन नायर के कर्नाटक लौटने और मलेवार के चोटिल होने के बाद मोखाडे ने मिले मौके को पूरी तरह भुनाया।
भारत के ओपनर यशस्वी जायसवाल के कोच ज्वाला सिंह 2023 से मोखाडे के साथ काम कर रहे हैं। ज्वाला सिंह का मानना है कि मोखाडे की मेहनत, अनुशासन और मानसिक मजबूती ही उनकी सफलता की सबसे बड़ी वजह है। रणजी ट्रॉफी, सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी और अब विजय हजारे ट्रॉफी में निरंतर प्रदर्शन ने उन्हें एक संभावित ऑल-फॉर्मेट खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया है।
चौथे प्रथम श्रेणी सत्र में खेल रहे अमन मोखाडे ने इंतजार को अवसर में बदला है। अब उनकी नजरें फाइनल में एक और बड़ी पारी खेलकर विदर्भ को खिताब दिलाने पर टिकी हैं।
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