किसी का बेटा मेरे हाथों मारा जाता है तो नहीं होती खुशी, ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट' शब्द मुझे पसंद नहीं: बराड़
मैं 'ठोक देने' की नीति से ज्यादा बातचीत और सुधार में विश्वास रखता हूं
हमेशा अपराधियों को सरेंडर करने का मौका जरूर देते हैं
स्थितियां विपरीत होती हैं तो दोनों तरफ से फायरिंग हो जाती है
क्राइम एक भ्रम है, हर अपराधी को एक दिन कानून के दायरे में आना ही पड़ता है
विदेश में बैंठे गैंगस्टरों को भ्रम है कि वे सेफ हैं, भ्रम एक दिन टूटेगा जरूर
विक्की गौंडर और मैं साथ खेलते रहे हैं, यह बात बिल्कुल गलत हैं
अमनप्रीत कौर बाजवा, चंडीगढ़
‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट' यह शब्द अक्सर मेरे नाम के साथ जोड़ा जाता हे, लेकिन सच कहूं तो मुझे यह नाम बिल्कुल पसंद नहीं है। किसी का बेटा हमारे हाथों मारा जाए, इससे हमें खुशी नहीं होती। हम लोक सेवक हैं और हमारा काम कानून व्यवस्था बनाए रखना है। मैं खुद को एक अच्छा पुलिस अधिकारी कहलाना ज्यादा पसंद करता हूँ, जो समाज की सेवा करे। यह नहीं कि मेरे हाथों कोई मारा जाए और मुझे एनकाउंटर स्पेशलिस्ट का तमंगा मिले। यह सब स्थिति के अनुसार ही होता है। मैं 'ठोक देने' की नीति से ज्यादा बातचीत और सुधार में विश्वास रखता हूँ। प्रीत सेखो का मामला इसका उदाहरण है। हमने एनकाउंटर के बीच में गुरुद्वारे से मुनादी करवाई, पाठी सिंह को बुलाया और आरोपी को सरेंडर करने के लिए मनाया। आज वह जेल में है और किसी अपराध में उसका नाम नहीं आया। यह बातें पंजाब पुलिस के जांबाज अधिकारी और कई बड़े ऑपरेशनों को अंजाम देने वाले एसपी बिक्रम बराड़ ने खास बातचीत में कही। अपराध की दुनिया के इनसाइक्लोपीडिया माने जाने वाले बराड़ ने विशेष साक्षात्कार में अपनी निजी जिंदगी, शहीद पिता की विरासत और पंजाब के चर्चित एनकाउंटरों के अनसुने पहलुओं को साझा किया। पढिए प्रमुख अंश:
आपके परिवार की पृष्ठभूमि काफी गौरवमयी रही है, पुलिस में आने का विचार कब आया?
मैं एक शहीद के परिवार से हूँ। 1988 में जब मैं सिर्फ 8 साल का था, तब मेरे पिता (जो स्वयं पुलिस में थे) आतंकवाद के दौर में शहीद हो गए थे। मुझे आज भी वो बरसात वाला दिन याद है जब स्कूल से मुझे घर लाया गया और घर में मातम छाया था। दरियां बिछाईं जा रही थीं। पिताजी की उस शहादत ने मुझे डराया नहीं,बचपन से ही उन्हें वर्दी में देखना और उनके साथ रहना मेरे मन में घर कर गया था। मेरा जुनून शुरू से ही पंजाब पुलिस जॉइन करने का था। समाज की सेवा के लिए मैं प्रेरित हुआ। मेरे बड़े भाई भी पुलिस में हैं, यह हमारे खून में है। इसलिए मैंने पुलिस ने आकर सेवा करना चुना।
वायलेंस व्यक्ति बाहर से ग्रहण करता हैं, या उसके अंदर ही होती है, आप क्या मानते हैं?
कोई भी व्यक्ति जन्म से गैंगस्टर/बदमाश नहीं होता। धीरे-धीरे उम्र के साथ साथ उसके आसपास का माहौल, उसकी संगति का उस पर बहुत प्रभाव पड़ता है। संगति बहुत बार व्यक्ति के विचार बदल कर उसमें भ्रम की स्थिति पैदा कर देती है और वह गलत राह पकड़ लेता है और आज के इस आधुनिक युग में युवा भ्रम की स्थित में जल्द आ रहे हैँ और वायलेंस को अपना रहना गलत राह पर चल रहे हैं।
विक्की गोंडर और अंकित भादू जैसे बड़े गैंगस्टरों के खिलाफ ऑपरेशन काफी 'फिल्मी' रहे, उनके पीछे की कहानी क्या है?
हर ऑपरेशन के पीछे कड़ी मेहनत और धैर्य होता है। विक्की गोंडर के मामले में हमने राजस्थान के एक गाँव में सात दिन भेष बदलकर बिताए। एक छोटी सी लीड—'गुलाब जामुन'—ने हमें उसके ठिकाने तक पहुँचाया। गोंडर बहुत शातिर था। हम राजस्थान मे कभी माली तो कभी कीनू बेचने वाले बनकर घूमे। हमें एक इनपुट मिला कि गोंडर को 'काली गुलाब जामुन' बहुत पसंद है और वह अक्सर उसकी फोटो जेल में अपने साथियों को भेजता था। उस मिठाई की दुकान और एक खास रैपर के जरिए हमने उसके ठिकाने की शिनाख्त की और उस तक पहुंच बनाई। वहीं अंकित भादू के एनकाउंटर के दौरान उसने दो छोटी बच्चियों को बंधक बना लिया था। वह पल बहुत तनावपूर्ण था, लेकिन हमारी टीम ने सूझबूझ से बच्चियों को सुरक्षित निकाला और अपराधी को ढेर किया।
आपने विक्की गोंडर और जयपाल भुल्लर जैसे बड़े गैंगस्टरों को करीब से देखा है। खिलाड़ी से अपराधी बनने का यह सफर कैसे शुरू होता है?
यह बहुत दुखद है। विक्की गोंडर, जयपाल और प्रेमा लाहौरिया, ये सभी अच्छे खिलाड़ी थे। मैं खुद एक इंटरनेशनल मुक्केबाज रहा हूँ। अक्सर जब खिलाड़ी खेल में असफल होते हैं या उन्हें सही दिशा नहीं मिलती, तो वे अपनी ऊर्जा गलत जगह लगा देते हैं। अपराध एक 'इल्यूजन' (भ्रम) है। शुरुआत में इसमें नाम और रसूख दिखता है, लेकिन हकीकत से टकराते ही यह भ्रम टूट जाता है।
यह कहा जाता है कि जालंधर पीएपी में आप और विक्की गौंडर एक साथ खेलते रहे हैं, हकीकत क्या है?
यह तथ्य बिल्कुल गलत है, मैं पटियाला में पढ़ा हूं और विक्की गौंडर से 10 साल बड़ा हूं। न जाने किसने सोशल मीडिया पर यह अफवाह किस ने फैला था। मैं और गौंडर कभी साथ नहीं रहे।
लकी पटियाल और गोल्डी बराड़ जैसे लोग विदेशों से गैंग चला रहे हैं। क्या पुलिस उन तक पहुँच पाएगी?
कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं। 'रोमी' (हांगकांग) का मामला देख लीजिए, पांच साल लगे लेकिन आज वह पंजाब की जेल में है। जो लोग विदेश बैठकर पंजाब का माहौल खराब कर रहे हैं, वे भी जल्द ही सलाखों के पीछे होंगे। हम अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क में हैं।
सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड पंजाब के लिए एक बड़ा घाव है, इस पर आपकी क्या राय है?
वह पंजाब का एक चमकता सितारा था, उसकी मौत का सभी को दुख है। मर्डर से पहले पुलिस ने उन्हें कई बार खतरों के बारे में जागरूक किया था। हमारी टीम ने इस केस में दिन-रात मेहनत की और मुख्य शूटरों को न्यूट्रलाइज किया। मुझे पूरा भरोसा है कि बाकी दोषियों को भी कड़ी सजा मिलेगी।
आज के युवाओं के लिए आपका क्या संदेश है, जो गैंगस्टर कल्चर की ओर आकर्षित हो रहे हैं?
अपराध एक भ्रम (इलयूजन) है, जिसमें इंसान खुद को महान समझता है, लेकिन हकीकत से टकराते ही यह भ्रम टूट जाता है। क्योंकि कितना ही बड़ा अपराधी क्यों न हो, उसे एक न एक दिन कानून के दायरे में आते हुए कानून का सामना करना पड़ता है। विदेश में बैठे गैंगस्टर भी नही बच पाएंगे, एक न एक दिन उन्हें भी कानून का सामना करना ही पड़े। इसलिए युवाओं को उनसे प्रेरित नहीं होना चाहिए। वे खेल और पढ़ाई पर ध्यान दें। लोगों से अपील हे कि हमारी हेल्पलाइन पर जानकारी दें, हम आपकी सुरक्षा के लिए तैयार हैं।
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