सीएम के निर्देशों पर क्यूएए द्वारा हरियाणा की अवसंरचना परियोजनाओं में पारदर्शिता और गुणवत्ता को बढ़ाया जा रहा है परियोजना स्थलों पर पूर्ण तकनीकी विवरण एवं नियमित प्रगति अपडेट के साथ क्यूआर कोड लगाए जाएंगे
सीएम के निर्देशों पर क्यूएए द्वारा हरियाणा की अवसंरचना परियोजनाओं में पारदर्शिता और गुणवत्ता को बढ़ाया जा रहा है परियोजना स्थलों पर पूर्ण तकनीकी विवरण एवं नियमित प्रगति अपडेट के साथ क्यूआर कोड लगाए जाएंगे
खबर खास, चंडीगढ़ :
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देशों के अनुसार क्वालिटी एश्योरेंस अथॉरिटी (क्यूएए)-हरियाणा राज्यभर में इंजीनियरिंग अवसंरचना परियोजनाओं में गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही को सुदृढ़ करने के व्यापक दायित्व के साथ कार्य कर रही है।
इस संबंध में जानकारी देते हुए क्वालिटी एश्योरेंस अथॉरिटी के अध्यक्ष राजीव अरोड़ा (सेवानिवृत्त आईएएस) ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप, क्यूएए ने विभिन्न विभागों की प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं का दो चरणों में विस्तृत तकनीकी ऑडिट किया है, जिसमें 25 बड़ी परियोजनाएं शामिल हैं।
इन ऑडिट्स का फोकस डिजाइन की पर्याप्तता, डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) के प्रावधानों का अनुपालन, निर्माण गुणवत्ता, अनुबंध प्रबंधन, सुरक्षा पहलू तथा दीर्घकालिक स्थिरता पर रहा। इन ऑडिट्स के आधार पर विस्तृत तकनीकी ऑडिट रिपोर्ट तैयार कर संबंधित प्रशासनिक विभागों और कार्यान्वयन एजेंसियों को अनुपालन एवं सुधारात्मक कार्रवाई के लिए भेजी गई हैं।
क्यूएए को 16 फरवरी, 2026 तक विभागों से प्राप्त एक्शन टेकन रिपोर्ट्स (एटीआर) के साथ क्यूएए के स्वतंत्र अवलोकन, टिप्पणियां और सिफारिशों को सम्मिलित करते हुए एक व्यापक समेकित प्रस्तुति तैयार करने का भी दायित्व सौंपा गया है। इस प्रस्तुति में जहां आवश्यक होगा, अधिकारियों या कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई के सुझाव तथा परियोजनाओं की समयबद्ध पूर्णता और उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक अतिरिक्त उपाय भी शामिल होंगे।
निर्देशों के अनुसार, क्यूएए द्वारा तैयार सभी ऑडिट रिपोर्टों को शीघ्र ही हरियाणा इंजीनियरिंग वर्क्स पोर्टल और मुख्यमंत्री डैशबोर्ड से जोड़ा जाएगा, जिसके लिए जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग को नोडल विभाग के रूप में कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।
परियोजनाओं की तैयारी और क्रियान्वयन को सुदृढ़ करने के लिए सभी ग्रीनफील्ड सड़क परियोजनाओं, सभी पुलों, फ्लाईओवरों, रोड ओवरब्रिज और रोड अंडरब्रिज, 5 करोड़ रुपये और उससे अधिक लागत की सभी भवन परियोजनाओं तथा 25 करोड़ रुपये और उससे अधिक लागत की सभी सड़क उन्नयन परियोजनाओं के लिए डीपीआर और डिजाइन कंसलटेंट की नियुक्ति अनिवार्य की गई है। कम लागत की परियोजनाओं के लिए संबंधित विभागों और मुख्य वास्तुकार के परामर्श से स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर और स्टैंडर्ड डिजाइन एवं ड्राइंग टेम्पलेट्स तैयार किए जाएंगे। इन एसओपी और टेम्पलेट्स के अंतिमकरण, मानकीकरण और आवधिक समीक्षा के लिए क्यूएए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगा।
इसके अतिरिक्त, 5 करोड़ रुपये और उससे अधिक लागत की सभी परियोजनाओं के लिए थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन और मॉनिटरिंग एजेंसियों की नियुक्ति अनिवार्य की गई है, ताकि स्वतंत्र गुणवत्ता जांच और निरंतर निगरानी सुनिश्चित की जा सके।
राजीव अरोड़ा ने बताया कि पारदर्शिता बढ़ाने और सोशल ऑडिट को सुगम बनाने के उद्देश्य से सभी परियोजना स्थलों पर क्यूआर कोड अनिवार्य रूप से प्रदर्शित किए जाएंगे। ये क्यूआर कोड समर्पित डिजिटल पेजों से जुड़े होंगे, जिनमें डीपीआर सारांश और बिल्स ऑफ क्वांटिटीज, स्वीकृत तकनीकी विनिर्देश, ठेकेदारों, इंजीनियर्स-इन-चार्ज और कंसल्टेंट्स के नाम, तथा भौतिक और वित्तीय प्रगति की मासिक जानकारी उपलब्ध होगी।
उन्होंने बताया कि समग्र योजना सुनिश्चित करने के लिए परियोजनाओं के स्प्लिटिंग को प्रतिबंधित कर दिया गया है। सभी परियोजनाओं को एकल प्रशासनिक स्वीकृति और निविदा के माध्यम से मंजूरी दी जाएगी, जिसमें सभी परस्पर जुड़े और आश्रित घटक शामिल होंगे। टेंडर तैयार करने और स्वीकृत करने वाले अधिकारी को यह स्पष्ट रूप से प्रमाणित करना होगा कि सभी आश्रित घटकों को कार्यक्षेत्र में विधिवत शामिल किया गया है।
ड्रेनेज प्लानिंग को सभी डीपीआर का अनिवार्य और अभिन्न घटक बना दिया गया है। विभागों को शहरी और ग्रामीण ड्रेनेज प्रणालियों के लिए स्टैंडर्ड डिजाइन टेम्पलेट्स विकसित करने, अंतर-विभागीय समन्वय सुनिश्चित करने और क्रियान्वयन को समन्वित करने के निर्देश दिए गए हैं। रनऑफ के निस्तारण और भूजल रिचार्ज के लिए अंडरग्राउंड रिचार्ज वेल्स के उपयोग पर भी जोर दिया गया है।
सड़कों और नहरों के साथ-साथ सरकारी भूमि पर अतिक्रमण को प्राथमिकता के आधार पर लिया गया है। सभी अतिक्रमणों को राजस्व अधिकारियों के साथ निकट समन्वय में हटाया जाएगा। राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्य राजमार्गों, मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड्स और प्रमुख सिंचाई नहरों एवं वितरिकाओं के लिए राइट ऑफ वे डिमार्केशन राज्यव्यापी, समयबद्ध आधार पर, प्राथमिकता से जीपीएस या जीआईएस तकनीक और स्टोन पिलर्स के माध्यम से किया जाएगा।
आगे से परियोजनाओं को क्यूएए द्वारा विकसित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग मेथड्स एंड प्रोसीजर्स स्कोरिंग सिस्टम के आधार पर रेट किया जाएगा। 75 अंक से कम स्कोर करने वाली परियोजनाओं को असंतोषजनक और अस्वीकार्य माना जाएगा, 75 से 90 अंक के बीच स्कोर करने वाली परियोजनाओं में सुधार और सुधारात्मक कार्रवाई आवश्यक होगी, जबकि 90 अंक से अधिक स्कोर करने वाली परियोजनाओं को संतोषजनक और पूर्णतः अनुपालक माना जाएगा।
क्यूएए को लोक निर्माण विभाग (भवन एवं सड़कें), हरियाणा को नोडल विभाग रखते हुए, सड़क पुलों के बेहतर रखरखाव के लिए एक व्यापक ब्रिज मेंटेनेंस पॉलिसी के माध्यम से नीति निर्माण में योगदान देने का भी दायित्व सौंपा गया है।
निरंतर गुणवत्ता आश्वासन सुनिश्चित करने के लिए क्यूएए नियमित रूप से गुणवत्ता ऑडिट करेगा। सभी सरकारी इंजीनियरिंग विभागों के क्वालिटी कंट्रोल विंग्स के अधिकारियों को क्यूएए के साथ जोड़ा जाएगा ताकि इसकी मानव संसाधन क्षमता सुदृढ़ हो सके। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2026 बैच के गेट-योग्य युवा पेशेवरों को एचकेआरएनएल के माध्यम से क्वालिटी एश्योरेंस एसोसिएट्स के रूप में तैनात किया जाएगा, ताकि क्यूएए की क्षमता और अधिक सशक्त हो सके। क्यूएए को सरकारी विभागों के लिए नियमित प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि हरियाणा में इंजीनियरिंग अवसंरचना की निरंतर गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।
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