कुल 2.21 लाख में से केवल लगभग 14 हजार ही पाए गए पात्र, लगभग 1.93 लाख श्रमिक पंजीकरण फर्जी- श्रम विभाग की जांच में बड़ा खुलासा हरियाणा में फर्जी वर्कस्लिपों का जाल टूटा- 13 जिलों में 5.46 लाख अवैध कार्य रसीदें पकड़ी गईं
कुल 2.21 लाख में से केवल लगभग 14 हजार ही पाए गए पात्र, लगभग 1.93 लाख श्रमिक पंजीकरण फर्जी- श्रम विभाग की जांच में बड़ा खुलासा हरियाणा में फर्जी वर्कस्लिपों का जाल टूटा- 13 जिलों में 5.46 लाख अवैध कार्य रसीदें पकड़ी गईं
खबर खास, चंडीगढ़ :
हरियाणा के श्रम विभाग के तहत संचालित हरियाणा भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में लंबे समय से चली आ रही वर्कस्लिप (कार्य रसीद) से जुड़ी गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। आरंभिक जांच में इस घोटाले की राशि लगभग 1500 करोड़ रुपए तक होने की बताई जा रही है। हरियाणा के श्रम मंत्री अनिल विज की नजरों में इस घोटाले के उजागर होते ही उन्होंने इस प्रकरण में किसी प्रतिष्ठित जांच एजेंसी से गहन जांच कराने के लिए मुख्यमंत्री को लिखा है।
इस संबंध में जानकारी देते हुए श्रम मंत्री ने बताया कि हाल ही में उन्होंने बोर्ड की एक बैठक की अध्यक्षता की थी, जिसमें बोर्ड सदस्यों की नियुक्ति में अनियमितताओं के साथ-साथ निर्माण श्रमिकों को दी जाने वाली योजनाओं के लाभ वितरण में भी गड़बड़ियां सामने आईं। इसके बाद उन्होंने तत्काल जांच के आदेश दिए।
विज ने बताया कि प्रारंभिक तौर पर हिसार, कैथल, जींद, सिरसा, फरीदाबाद और भिवानी जिलों में जांच कराई गई, जहां बड़े पैमाने पर अनियमितताएं पाई गईं। इसके पश्चात राज्य के सभी जिलों के उपायुक्तों को निर्देश जारी कर जिला स्तरीय समितियों का गठन किया गया, जिनमें श्रम विभाग के अधिकारी सहित तीन अन्य अधिकारी शामिल किए गए। इन समितियों द्वारा अगस्त 2023 से मार्च 2025 के बीच जारी की गई ऑनलाइन वर्कस्लिपों का भौतिक सत्यापन किया जा रहा है। यह प्रक्रिया लगभग चार माह पूर्व शुरू की गई थी, जिसमें अब तक 13 जिलों में 100 प्रतिशत सत्यापन पूरा हो चुका है।
केवल 53,249 वर्कस्लिपें वैध, जबकि 5,46,509 वर्कस्लिपें अवैध
श्रम मंत्री ने बताया कि इन 13 जिलों में करनाल, रेवाड़ी, नूंह (मेवात), महेंद्रगढ़, गुरुग्राम, झज्जर, पलवल, पानीपत, रोहतक, सोनीपत, पंचकूला, सिरसा और कैथल शामिल हैं, में कुल 5,99,758 वर्कस्लिपें जारी की गई थीं, जिनमें से केवल 53,249 वर्कस्लिपें वैध पाई गईं, जबकि 5,46,509 वर्कस्लिपें अवैध पाई गईं। इसी प्रकार, कुल 2,21,517 श्रमिकों के पंजीकरण में से सत्यापन के बाद केवल 14,240 श्रमिक ही पात्र पाए गए, जबकि 1,93,756 पंजीकरण फर्जी पाए गए।
जो पात्र नहीं हैं, वे योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं
विज ने कहा कि यह स्पष्ट हो गया है कि कई स्थानों पर गांव के गांव फर्जी पंजीकरण कर वर्कस्लिपें बनाई गईं, ताकि अपात्र लोग सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकें। एक श्रमिक को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से औसतन 2.5 लाख रूपए तक का लाभ दिया जाता है, जिससे सरकार को भारी वित्तीय क्षति होने की संभावना है। श्रम मंत्री ने कहा कि “जो पात्र नहीं हैं, वे योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं। यह सीधी-सीधी लूट है और सरकार को सैकड़ों करोड़ रुपये की आर्थिक हानि पहुंचाई जा रही है।”
नए आवेदन स्वीकार न करने के दिए गए निर्देश
उन्होंने बताया कि सत्यापन समितियों द्वारा कार्यस्थल की वास्तविकता, निर्माण कार्य में सहभागिता, नियोक्ता विवरण, स्थानीय जांच और क्षेत्र भ्रमण सहित सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। जांच अवधि के दौरान आरटीएस की समय-सीमा रोकी गई, सरल केंद्रों को नए आवेदन स्वीकार न करने के निर्देश दिए गए तथा सभी शिकायत निवारण प्लेटफार्मों को आवश्यक सूचनाएं जारी की गईं। श्री विज ने स्पष्ट किया कि पहले से स्वीकृत पेंशन योजनाओं को रोका नहीं गया है, जबकि मृत्यु, दुर्घटना एवं अंत्येष्टि सहायता जैसी योजनाओं का लाभ प्राथमिकता के आधार पर जारी किया जा रहा है।
श्रम मंत्री ने दोहराया कि भ्रष्टाचार पर किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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