त्रि-सेवा झांकी में दिखेगा निर्णायक भारत, यूरोपीय संघ के दो शीर्ष नेता होंगे मुख्य अतिथि
त्रि-सेवा झांकी में दिखेगा निर्णायक भारत, यूरोपीय संघ के दो शीर्ष नेता होंगे मुख्य अतिथि
ख़बर ख़ास, चंडीगढ़ :
गणतंत्र दिवस 2026 का आयोजन इस बार कई मायनों में ऐतिहासिक और यादगार होने जा रहा है। कर्तव्य पथ पर निकलने वाली गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय सशस्त्र बलों की त्रि-सेवा झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगी। इस झांकी का विषय ‘ऑपरेशन सिंदूर: जॉइंटनेस के माध्यम से विजय’ रखा गया है, जो भारत की बदलती सैन्य सोच, संयुक्त युद्ध क्षमता और आत्मनिर्भर रक्षा शक्ति का प्रभावशाली प्रदर्शन करेगा।
झांकी के जरिए यह स्पष्ट संदेश दिया जाएगा कि अब भारत तेज, सटीक और निर्णायक कार्रवाई करने में पूरी तरह सक्षम है। इसमें थलसेना, नौसेना और वायुसेना के बीच बेहतरीन तालमेल को क्रमवार और जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। झांकी की शुरुआत भारतीय नौसेना की समुद्री शक्ति से होगी, जो यह दर्शाएगी कि भारत समुद्र में किसी भी तरह की दुश्मन हरकत को रोकने में पूरी तरह समर्थ है। इसके बाद थलसेना का निर्णायक रूप सामने आएगा, जहां एम-777 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर की सटीक गोलाबारी दुश्मन के मंसूबों को नाकाम करती दिखाई देगी। इसके साथ ही आकाश वायु रक्षा प्रणाली भारत की मजबूत और बहु-स्तरीय वायु सुरक्षा का प्रतीक बनेगी।
झांकी के मध्य भाग में भारत की नई राष्ट्रीय सुरक्षा नीति की झलक देखने को मिलेगी, जिसका मूल मंत्र है—तेज कार्रवाई, दबाव बनाकर नियंत्रण और बिना चूक के सटीक वार। हारोप लोइटरिंग म्यूनिशन के जरिए दुश्मन के एयर डिफेंस रडार को नष्ट करते हुए दिखाया जाएगा, जो मानवरहित युद्ध तकनीक में भारत की बढ़ती बढ़त को दर्शाता है। इसके बाद स्कैल्प मिसाइलों से लैस राफेल विमान आतंकवादी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक करते नजर आएंगे, जबकि सुखोई से दागी गई ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल दुश्मन के मजबूत एयरक्राफ्ट शेल्टर को तबाह करती दिखाई देगी।
सबसे निर्णायक दृश्य तब आएगा जब एस-400 वायु रक्षा प्रणाली 350 किलोमीटर दूर तक लक्ष्य भेदते हुए दुश्मन के एयरबोर्न अर्ली वार्निंग प्लेटफॉर्म को निष्क्रिय करेगी। यह साफ संदेश होगा कि भारत पहले देखता है, पहले फैसला करता है और पहले वार करता है। ऑपरेशन सिंदूर के हर चरण में तीनों सेनाओं के बीच परिपक्व तालमेल, सटीक खुफिया जानकारी और न्यूनतम नुकसान के साथ मिशन पूरा करने की क्षमता को दर्शाया जाएगा।
गौरतलब है कि इस वर्ष गणतंत्र दिवस पर कूटनीतिक स्तर पर भी नया इतिहास रचा जाएगा। Republic Day 2026 के लिए यूरोपीय संघ के दो शीर्ष नेताओं—यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा—को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। यह भारत और यूरोप के मजबूत होते रणनीतिक रिश्तों का प्रतीक है।
कुल मिलाकर, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की यह झांकी सिर्फ एक सैन्य प्रदर्शन नहीं, बल्कि भारत का स्पष्ट रणनीतिक ऐलान है कि ‘जॉइंटनेस से विजय’ अब उसकी नई पहचान और उसकी सबसे बड़ी ताकत बन चुकी है।
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