आबकारी, पर्यावरण और श्रम क़ानूनों के गंभीर उल्लंघन सामने आए; प्रेस की स्वतंत्रता सुरक्षित, लेकिन क़ानून सभी पर समान रूप से लागू
आबकारी, पर्यावरण और श्रम क़ानूनों के गंभीर उल्लंघन सामने आए; प्रेस की स्वतंत्रता सुरक्षित, लेकिन क़ानून सभी पर समान रूप से लागू
ख़बर ख़ास, चंडीगढ़ :
पंजाब सरकार ने पंजाब केसरी ग्रुप द्वारा लगाए गए “निशाने पर लेकर की गई कार्रवाई” के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह बयान वैधानिक जाँचों के दौरान सामने आए गंभीर और दर्ज क़ानूनी उल्लंघनों से ध्यान भटकाने का प्रयास है। सरकार ने स्पष्ट किया कि विभिन्न वैधानिक प्राधिकरणों ने अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में जाँच कर ठोस उल्लंघन दर्ज किए हैं, जिन पर कार्रवाई करना क़ानूनी दायित्व है।
सरकार के अनुसार, समूह निरीक्षणों और कार्रवाइयों की सूची तो प्रस्तुत कर रहा है, लेकिन उनके कारण, निष्कर्ष और परिणामों को जानबूझकर नज़रअंदाज़ किया जा रहा है, जबकि ये सभी तथ्य आधिकारिक निरीक्षण रिपोर्टों, वैधानिक नोटिसों और कारणयुक्त आदेशों में स्पष्ट रूप से दर्ज हैं। सरकार ने कहा कि यह मामला न तो पत्रकारिता से जुड़ा है, न विज्ञापनों से और न ही संपादकीय विचारों से; इसकी शुरुआत आधिकारिक रिकॉर्ड पर मौजूद ठोस सबूतों से होती है।
जालंधर स्थित पार्क प्लाज़ा में की गई आबकारी कार्रवाई को लेकर सरकार ने बताया कि यह कोई सामान्य निरीक्षण नहीं, बल्कि औपचारिक जाँच का नतीजा थी। जाँच के दौरान 800 से अधिक शराब की बोतलें अनधिकृत स्थानों से ज़ब्त की गईं। कई बोतलों पर अनिवार्य आबकारी होलोग्राम और क्यूआर कोड नहीं पाए गए। सबसे गंभीर तथ्य यह सामने आया कि मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त, एक्सपायर्ड ड्राफ्ट बीयर कई दिनों तक ग्राहकों को परोसी जा रही थी। ये सभी निष्कर्ष कारण बताओ नोटिस, व्यक्तिगत सुनवाई, रिकॉर्ड की जाँच और लाइसेंसधारी की स्वीकारोक्तियों के बाद पारित लिखित आदेश में दर्ज हैं।
निरीक्षण में पाया गया कि पहली मंज़िल पर 815 और भूतल पर 140 बोतलें अनधिकृत स्थानों पर संग्रहीत थीं, जो पंजाब लिकर लाइसेंस नियम, 1956 के नियम 37(2) का सीधा उल्लंघन है। बिना लेबल, होलोग्राम और क्यूआर कोड वाली शराब का रखना और बेचना गंभीर अपराध है और “अज्ञानता” को किसी भी स्थिति में बचाव के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि कार्रवाई केवल आबकारी उल्लंघनों तक सीमित नहीं थी। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जाँचों में होटल संचालन से जुड़े गंभीर पर्यावरणीय और सार्वजनिक स्वास्थ्य से संबंधित उल्लंघन दर्ज किए गए। लॉन्ड्री में प्रयुक्त रसायनों को बिना उपचार के सीधे ज़मीन और सीवर में छोड़ा जा रहा था, जिससे भूजल प्रदूषण का खतरा पैदा हो रहा था। आवश्यक “संचालन की सहमति” की अवधि समाप्त होने के बावजूद होटल बिना वैध अनुमति के संचालित पाया गया। सीवेज और अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र कार्यशील नहीं थे और बिना उपचारित अपशिष्ट को सीधे नगर निगम के सीवर में छोड़ा जा रहा था।
जाँच में खतरनाक अपशिष्ट प्रबंधन नियमों और ठोस कचरा प्रबंधन नियमों के उल्लंघन भी सामने आए, जिनमें रिकॉर्ड न रखना, सुरक्षित भंडारण की कमी और कचरे का अनुचित निपटान शामिल है। सरकार ने कहा कि ये केवल तकनीकी चूक नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य, भूजल और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा हैं।
इसके अलावा, श्रम एवं फैक्ट्री विभाग की जाँचों में समूह से जुड़ी प्रिंटिंग इकाइयों में श्रम क़ानूनों और सुरक्षा मानकों के कई उल्लंघन पाए गए। जालंधर और लुधियाना स्थित इकाइयों में अवरुद्ध फायर एग्ज़िट, असुरक्षित मशीनरी, एक्सपायर्ड अग्निशमन उपकरण, रिकॉर्ड-रखरखाव में कमी और असुरक्षित कार्यस्थल जैसी खामियां दर्ज की गईं।
सरकार ने दोहराया कि प्रेस की स्वतंत्रता के नाम पर आबकारी, पर्यावरण और श्रम क़ानूनों का उल्लंघन स्वीकार्य नहीं है। “आज के पंजाब में क़ानून सभी पर समान रूप से लागू होता है। संपादकीय स्वतंत्रता की रक्षा की जाएगी, लेकिन सार्वजनिक स्वास्थ्य, मज़दूरों और पर्यावरण को खतरे में डालने वाले उल्लंघनों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जाएगा,” पंजाब सरकार ने कहा।
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