16वें वित्त आयोग की सिफारिशों से हिमाचल की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा दीर्घकालिक असर, राज्य को सबसे अधिक नुकसान
16वें वित्त आयोग की सिफारिशों से हिमाचल की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा दीर्घकालिक असर, राज्य को सबसे अधिक नुकसान
ख़बर ख़ास, शिमला:
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) को समाप्त करना केवल सरकार का विषय नहीं है, बल्कि यह हिमाचल प्रदेश के लोगों के संवैधानिक और वित्तीय अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला है। वित्त विभाग द्वारा राज्य की वित्तीय स्थिति और आरडीजी समाप्त करने के प्रभावों पर दी गई विस्तृत प्रस्तुति के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट का राज्य की अर्थव्यवस्था और आने वाले बजट पर दूरगामी प्रभाव पड़ेगा।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष कुलदीप पठानिया, मंत्रिमंडल के सदस्य, विधायक, प्रशासनिक सचिव, विभागाध्यक्ष और राज्य मीडिया के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सीएम ने इस महत्वपूर्ण प्रस्तुति में भाजपा विधायकों की अनुपस्थिति पर खेद व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें आकर राज्य की गंभीर वित्तीय स्थिति को समझना चाहिए था।
सीएम सुक्खू ने कहा कि 17 राज्यों के लिए आरडीजी समाप्त किया गया है, लेकिन हिमाचल प्रदेश पर इसका सबसे अधिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है, क्योंकि राज्य के कुल बजट का 12.7 प्रतिशत हिस्सा आरडीजी से आता है, जो देश में दूसरा सबसे अधिक है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस मुद्दे को लेकर भाजपा सांसदों और विधायकों के साथ मिलकर प्रधानमंत्री से मिलने को भी तैयार है। उन्होंने चेतावनी दी कि एक बार आरडीजी की व्यवस्था समाप्त हो जाने के बाद लोगों के अधिकारों को वापस पाना बेहद कठिन होगा।
सीएम ने जीएसटी लागू होने के बाद की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि पहले जहां कर संग्रहण की वृद्धि दर 13 से 14 प्रतिशत थी, वह अब घटकर लगभग 8 प्रतिशत रह गई है। एक उत्पादक राज्य होने के कारण, उपभोक्ता आधारित जीएसटी प्रणाली से हिमाचल की अर्थव्यवस्था को नुकसान हुआ है। उन्होंने मांग की कि जिन बिजली परियोजनाओं का कर्ज चुकता हो चुका है, उन पर राज्य को कम से कम 50 प्रतिशत रॉयल्टी दी जाए और 40 वर्ष पूरे कर चुकी परियोजनाएं राज्य को वापस सौंपी जाएं। इसके साथ ही उन्होंने 2012 से लंबित ₹4,500 करोड़ के बीबीएमबी बकाया और शानन पावर प्रोजेक्ट का मुद्दा भी उठाया।
वित्त विभाग के प्रधान सचिव देवेश कुमार ने बताया कि आरडीजी संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत दिया जाने वाला अनुदान है और 15वें वित्त आयोग तक यह राज्य को मिलता रहा। उन्होंने कहा कि आरडीजी समाप्त होने से वित्त वर्ष 2026-27 में राज्य को लगभग ₹6,000 करोड़ के संसाधन अंतर का सामना करना पड़ेगा, जबकि इसमें विकास कार्य और लंबित देनदारियां शामिल नहीं हैं।
सीएम ने अंत में दोहराया कि राज्य सरकार बिना आम आदमी पर बोझ डाले संसाधन जुटाने, सभी कल्याणकारी योजनाओं को जमीन पर लागू करने और हिमाचल प्रदेश के लोगों के वैध अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
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