यह सम्मेलन “एजुकेशन फॉर सस्टेनिंग क्लाइमेट एंड रेज़िलिएंस: ह्यूमनिस्टिक पर्सपेक्टिव्स” विषय पर आधारित है, जिसका उद्देश्य शिक्षा को जलवायु सस्टेनेबिलिटी, रेज़िलिएंस और मानवीय मूल्यों के साथ जोड़ते हुए प्रकृति संरक्षण पर वैश्विक संवाद को बढ़ावा देना है।
खबर खास, बठिंडा :
पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयू पंजाब) ने ग्लोबल एजुकेशनल रिसर्च एसोसिएशन (गेरा) के सहयोग से मंगलवार को दो-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘एडुकोन 2025’ का शुभारंभ किया। 2 और 3 दिसंबर को कुलपति प्रो. राघवेंद्र प्रसाद तिवारी के संरक्षण में आयोजित यह सम्मेलन “एजुकेशन फॉर सस्टेनिंग क्लाइमेट एंड रेज़िलिएंस: ह्यूमनिस्टिक पर्सपेक्टिव्स” विषय पर आधारित है, जिसका उद्देश्य शिक्षा को जलवायु सस्टेनेबिलिटी, रेज़िलिएंस और मानवीय मूल्यों के साथ जोड़ते हुए प्रकृति संरक्षण पर वैश्विक संवाद को बढ़ावा देना है।
उद्घाटन समारोह में एनसीटीई के अध्यक्ष प्रो. पंकज अरोड़ा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि क्लाइमेट रिस्पॉन्सिबिलिटी केवल वैज्ञानिक या तकनीकी मुद्दा नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं, नैतिकता और करुणा से जुड़ी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जलवायु एक्शन तभी सफल होगा जब प्रत्येक नागरिक सक्रिय भूमिका निभाए। उन्होंने एनईपी–2020 की सराहना करते हुए कहा कि यह मानववादी और पारिस्थितिक मूल्यों का उत्कृष्ट समन्वय प्रस्तुत करती है। उन्होंने उच्च शिक्षण संस्थानों से भारतीय ज्ञान परंपरा को वैश्विक दृष्टिकोण के साथ समाहित करते हुए जलवायु-संवेदनशील तथा सामाजिक रूप से उत्तरदायी नागरिक तैयार करने का आह्वान किया।
उद्घाटन समारोह में एसएनडीटी महिला विश्वविद्यालय, मुंबई की पूर्व कुलपति प्रो. वसुधा कामत ने “क्लासरूम्स टू क्लाइमेट एक्शन: रीइमेजिनिंग एजुकेशन” विषय पर मुख्य भाषण दिया। उन्होंने बढ़ते वैश्विक तापमान को गंभीर चेतावनी बताते हुए संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों को “सर्वाइवल टूल्स” की संज्ञा दी और शिक्षा में इनोवेशन, वैज्ञानिक साक्षरता, क्रिटिकल थिंकिंग और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। प्रो. कामत ने जल संरक्षण, वेटलैंड पुनर्स्थापन, कम्युनिटी क्लीन-अप ड्राइव और वेस्ट मैनेजमेंट जैसे युवाओं द्वारा नेतृत्व किए गए सफल पर्यावरणीय प्रयासों के उदाहरण प्रस्तुत किए और स्टूडेंट-ड्रिवन एनवायरनमेंटल लीडरशिप को प्रोत्साहित किया।
अपने उद्घाटन संबोधन में डीन इंचार्ज (अकादमिक्स) प्रो. आर. के. वुसिरिका ने कहा कि पर्यावरणीय सस्टेनेबिलिटी और क्लाइमेट एजुकेशन जिम्मेदार भविष्य निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। इस अवसर पर गेरा के प्रेसिडेंट प्रो. एस.पी. मल्होत्रा तथा गेरा मुख्यालय के प्रेसिडेंट प्रो. एस.के. बावा ने समूह-ज्ञान और संवाद-आधारित अकादमिक सहयोग के विज़न पर अपने विचार रखे।
समारोह के दौरान गुरु काशी विश्वविद्यालय के प्रो-वाइस चांसलर प्रो. जगतार सिंह धीमान को उनके उत्कृष्ट अकादमिक एवं व्यावसायिक योगदान के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड दिया गया। यह सम्मान प्रो. पंकज अरोड़ा द्वारा प्रदान किया गया। इस अवसर पर इन्फोटेक’एन’टेनमेंट इंक के सीईओ डॉ. भूपेंद्र सिंह भी उपस्थित रहे और उन्होंने प्रतिनिधियों को संबोधित किया। धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए कुलसचिव डॉ. विजय शर्मा ने संसाधनों के सर्वोत्तम उपयोग, रिडक्शन–रीयूज़–रीसाइक्लिंग प्रथाओं तथा भावी पीढ़ियों की सुरक्षा के लिए ग्रीन हैबिट्स को बढ़ावा देने के माध्यम से कैंपस सस्टेनेबिलिटी के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता दोहराई।
एडुकोन 2025 में भारत सहित कनाडा, नेपाल, भूटान, यूनाइटेड किंगडम, थाईलैंड, संयुक्त राज्य अमेरिका, बांग्लादेश और स्विट्ज़रलैंड के प्रतिष्ठित शिक्षाविद, नीति-निर्माता, शोधकर्ता, शिक्षक और युवा इनोवेटर्स भाग ले रहे हैं। इस दो दिवसीय हाइब्रिड-मोड कॉन्फ्रेंस का संचालन आयोजन सचिव डॉ. शमशीर सिंह ढिल्लों (शिक्षा विभागाध्यक्ष एवं अधिष्ठाता), आयोजन सचिव प्रो. दीपक चौहान (अधिष्ठाता, विधि अध्ययन विद्यापीठ), सह–आयोजन सचिव प्रो. विपन पाल सिंह (अंग्रेज़ी विभागाध्यक्ष) तथा सह–आयोजन सचिव डॉ. संजीव कुमार (इतिहास विभागाध्यक्ष) द्वारा किया जा रहा है।
अगले दो दिनों के दौरान प्रतिभागी टेक्निकल सेशन, विशेषज्ञ व्याख्यान, पैनल डिस्कशन, ई–डायलॉग और छात्र–केंद्रित गतिविधियों में भाग लेंगे। सम्मेलन का वैलेडिक्टरी सेशन बुधवार को आयोजित किया जाएगा।
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