1 नवंबर से प्रारंभ होकर 25 नवंबर तक लगभग एक माह चलने वाले इन धार्मिक समागमों का उद्देश्य गुरु साहिब के आत्मबलिदान, अमन-शांति और सार्वभौमिक भाईचारे के संदेश का अधिक से अधिक प्रसार करना है।
1 नवंबर से प्रारंभ होकर 25 नवंबर तक लगभग एक माह चलने वाले इन धार्मिक समागमों का उद्देश्य गुरु साहिब के आत्मबलिदान, अमन-शांति और सार्वभौमिक भाईचारे के संदेश का अधिक से अधिक प्रसार करना है।
खबर खास, चंडीगढ़ :
हिंद की चादर श्री गुरु तेग़ बहादुर जी की अद्वितीय शहादत को नमन करने के लिए पंजाब सरकार द्वारा नौवें पातशाह जी के चरण-स्पर्श प्राप्त ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिबानों में चल रहे कीर्तन दरबारों और धार्मिक समागमों में भारी संख्या में संगत श्रद्धा से सहभागी हो रही हैं। 1 नवंबर से प्रारंभ होकर 25 नवंबर तक लगभग एक माह चलने वाले इन धार्मिक समागमों का उद्देश्य गुरु साहिब के आत्मबलिदान, अमन-शांति और सार्वभौमिक भाईचारे के संदेश का अधिक से अधिक प्रसार करना है।
यहां सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि श्री गुरु तेग़ बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस को समर्पित इन स्मृति समारोहों की श्रृंखला अब अपने मध्य चरण में प्रवेश कर चुकी है और विभिन्न ज़िलों में आयोजित इन धार्मिक समारोहों में श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं।
प्रवक्ता ने बताया कि 10 नवंबर को गुरुद्वारा साहिब सील और गुरुद्वारा साहिब लंग (ज़िला पटियाला) तथा गुरुद्वारा पातशाही नववीं, जखवाली (फ़तेहगढ़ साहिब) में कीर्तन समागम आयोजित किए जायेंगे। अगले दिन 11 नवंबर को गुरुद्वारा श्री नववीं पातशाही, कलौड़ (फ़तेहगढ़ साहिब), गुरुद्वारा साहिब हरपालपुर और गुरुद्वारा साहिब अगौल (ज़िला पटियाला) में होने वाले धार्मिक समागमों में भारी संख्या में संगत शामिल होगी।
उन्होंने आगे बताया कि 12 नवंबर को गुरुद्वारा साहिब काले के (श्री अमृतसर साहिब), गुरुद्वारा मगर साहिब (पटियाला) और गुरुद्वारा श्री गुरु तेग़ बहादुर जी, बस्सी पठाना (फ़तेहगढ़ साहिब) में स्मृति कार्यक्रम आयोजित किए जायेंगे, जो संगत को आध्यात्मिक रूप से निहाल करेंगे। इसी दिन गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब नववीं पातशाही, मूलोवाल (संगरूर) और भाई महां सिंह दीवान हाल, श्री मुक्तसर साहिब में भी धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जायेंगे।
प्रवक्ता ने कहा कि इन पावन स्थलों पर गुरबाणी कीर्तन, अरदास और कथा-विचार कार्यक्रम संगत को धर्म और मानवीय मूल्यों की रक्षा हेतु अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले नौवें पातशाह श्री गुरु तेग़ बहादुर जी की शाश्वत शिक्षाओं और दर्शन से ओतप्रोत करेंगे।
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