कृषि मंत्री ने राज्य स्तरीय कॉन्फ्रेंस के दौरान राज्य में वर्ष 2025 के दौरान पराली जलाने की घटनाओं में 53 प्रतिशत गिरावट को उभारा
कृषि मंत्री ने राज्य स्तरीय कॉन्फ्रेंस के दौरान राज्य में वर्ष 2025 के दौरान पराली जलाने की घटनाओं में 53 प्रतिशत गिरावट को उभारा
खबर खास, चंडीगढ़ :
पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार द्वारा वैज्ञानिक ढंग से फसल अवशेष प्रबंधन को प्रोत्साहित करने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि पर्यावरण संबंधी समस्याओं का समाधान हो, मिट्टी की सेहत में सुधार हो और किसानों की आय में वृद्धि हो सके। वे आज यहां ए.एस.ए.आर. द्वारा कैनोपी के सहयोग से आयोजित राज्य स्तरीय कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे।
खुड्डियां ने कहा कि लंबे समय से चली आ रही पराली जलाने की समस्या को पंजाब ने लाभकारी आर्थिक और पर्यावरण-अनुकूल अवसरों में बदलने में सफल रहा है। उन्होंने बताया कि पंजाब द्वारा फसल अवशेषों के सुचारू प्रबंधन के प्रयासों से प्रभावी और सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं, क्योंकि वर्ष 2025 के खरीफ सीजन में पराली जलाने की घटनाओं में 53 प्रतिशत की कमी आई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में ऐसी घटनाओं की संख्या 10,909 थी, जो अब घटकर 5,114 रह गई है।
कृषि मंत्री ने सब्सिडी वाली फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी, प्रोत्साहन और पराली के उपयोग के लिए व्यावहारिक विकल्पों की उपलब्धता को इस सफलता का कारण बताया। उन्होंने विस्तार से बताया कि राज्य द्वारा मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए आधुनिक इन-सीटू और एक्स-सीटू तरीकों का उपयोग करके हर साल उत्पन्न होने वाली 20 मिलियन टन पराली में से 80 प्रतिशत से अधिक पराली का वैज्ञानिक ढंग से प्रबंधन किया जा रहा है।
खुड्डियां ने कहा, ‘‘फसल अवशेषों को बायोमास-आधारित पावर प्लांटों, बायो-सी.एन.जी. यूनिटों और बायो-ईथेनॉल प्रोजेक्टों जैसे एक्स-सीटू एप्लिकेशनों में भी उपयोग किया जा रहा है, जिससे ऊर्जा और रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं। पराली, जो पहले धुएं का कारण थी, आज ऊर्जा, उद्योग और रोजगार का साधन बन रही है।’’
कृषि मंत्री ने एक ऐसे भविष्य की आशा व्यक्त की, जहां किसान फसल अवशेष प्रबंधन से पूरा लाभ उठा सकेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘जब फसल अवशेषों को ईंधन, ऊर्जा या किसी भी पैकेजिंग में बदला जा रहा है, तो इससे ग्रामीण रोजगार पैदा होता है और हमारे युवाओं को उनके घरों के नजदीक रोजगार के अवसर मिलते हैं। यही समावेशी और टिकाऊ विकास हमारा लक्ष्य है।’’
खुड्डियां ने उद्योगों को निमंत्रण देते हुए कहा कि हरियाली और टिकाऊ व्यावसायिक संभावनाओं वाला पंजाब, जो भारत का एकमात्र सर्कुलर इकोनॉमी रीजन बनने के लिए तैयार है, उससे उद्योगों को लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने राज्य द्वारा पराली को आय में बदलने की क्षमता और सामर्थ्य का हवाला देते हुए कहा, ‘‘धुएं की बजाय पराली को आय में बदलकर, राज्य प्रदूषण को समृद्धि में बदल रहा है। पंजाब साबित कर रहा है कि जलवायु गतिविधियाँ और आर्थिक विकास साथ-साथ चल सकते हैं।’’
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