चंडीगढ़ के सेक्टर 22 में रक्षाबंधन के दिन 15 अगस्त 2019 को आरोपी जीरकपुर निवासी कुलदीप सिंह ने दो सगी बहनों की हत्या कर दी थी।
चंडीगढ़ के सेक्टर 22 में रक्षाबंधन के दिन 15 अगस्त 2019 को आरोपी जीरकपुर निवासी कुलदीप सिंह ने दो सगी बहनों की हत्या कर दी थी।
खबर खास, चंडीगढ़ :
चंडीगढ़ में 2019 में दो बहनों की हत्या मामले में जिला अदालत ने आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने इसके साथ ही दोषी पर 30 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक चंडीगढ़ के सेक्टर 22 में रक्षाबंधन के दिन 15 अगस्त 2019 को आरोपी जीरकपुर निवासी कुलदीप सिंह ने दो सगी बहनों की हत्या कर दी थी। वह चंडीगढ़ पुलिस के सेवानिवृत्त इंस्पेक्टर का बेटा है। शादी से इनकार और शक के चलते उसने मनप्रीत कौर नामक युवती की हत्या की और उसे बचाने आई उसकी बहन राजवंत कौर की भी हत्या कर दी। बीते रोज ही कुलदीप को दोषी करार दिया गया था। इस मामले में 60 साल की एक बुजुर्ग महिला का बयान अहम सबूत बना, जो चीख-चिल्लाने की आवाज सुनकर इमारत की सबसे ऊपरी मंजिल पर पहुंची थी। वहां से उसने एक युवक को भागते हुए देखा था।
पुलिस जांच में सामने आया कि कुलदीप मनप्रीत से शादी करना चाहता था। वह दस सालों से एक-दूसरे को जानते थे। लेकिन मनप्रीत उससे कुछ समय से दूरी बनाने लगी। इतना ही नहीं वह न तो उसके फोन उठा रही थी और न ही मैसेज का जवाब दे रही थी। जिसके चलते कुलदीप को शक हुआ कि मनप्रीत का किसी और से चक्कर चल रहा है। 15 अगस्त को वह उनके पीजी के पिछले दरवाजे से उनके कमरे में घुसा। वहां दोनों बहनें सो रही थीं। कुलदीप, मनप्रीत का मोबाइल देखने लगा ही था कि उसकी नींद खुल गई और वह चिल्लाने लगी। कमरे में रखी एक टूटी कैंची से कुलदीप ने मनप्रीत पर जानलेवा हमला कर दिया। शोर सुनकर उसकी बहन राजवंत भी जाग गई और बहन को बचाने के लिए मिन्नत करती रही। लेकिन कुलदीप ने उसपर भी कैंची से वार किए और दोनों बहनों की मौके पर ही मौत हो गई। रक्षा बंधन के दिन उनका भाई उन्हें लगातार फोन करता रहा। लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया। इसके बाद उसने मकान मालिक को फोन किया। दोपहर को जब दो बजे मकान मालिक मौके पर पहुंचा तो देखा बाहर से कमरे का दरवाजा बंद था। उसने ताला तोड़कर अंदर देखा तो दोनों बहनें खून से लथपथ मृत पड़ी थी। मौके पर पहुंची पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली तो अल सुबह एक युवक को कमरे में प्रवेश करते देखा गया और दस मिनट बाद ही उसे वापस निकलते देखा गया। पड़ोस में रहने वाले एक नेपाली युवक ने फुटेज में युवक की पहचान कुलदीप के तौर पर की।
पुलिस ने अगले दिन कुलदीप को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया था। पूछताछ में उसने जुर्म कबूल करते हुए बताया था कि वह मनप्रीत से शादी करना चाहता था, लेकिन उसके इनकार के बाद उसने वारदात को अंजाम दिया। इस मामले में एक बुजुर्ग महिला 60 वर्षीय शशि का बयान बेहद अहम साबित हुआ। वह उसी इमारत में रहती थीं और टिफिन सर्विस चलाती थीं। उन्होंने अदालत में बताया था कि वह रोज तड़के 4-5 बजे उठ जाती थीं। घटना वाले दिन उन्होंने ऊपर से चीखने की आवाजें सुनीं और टॉप फ्लोर पर पहुंचीं। तो अंदर से राजवंत की आवाज सुनी कि 'मेरी बहन को मत मारो'। तभी एक युवक ने उन्हें देख लिया और कहा यहां कुछ नहीं है, आप चली जाओ और दरवाजा बंद कर दिया। कुछ देर बाद शशि ने खिड़की से देखा कि वही युवक पीठ पर बैग टांगे तेजी से भाग रहा था।
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