अपने संबोधन में कुलपति प्रोफेसर तिवारी ने वर्ष 1950 में भारतीय संविधान को अंगीकार किए जाने के ऐतिहासिक महत्व तथा डॉ. भीमराव आंबेडकर और संविधान सभा के सदस्यों के अमूल्य योगदान को स्मरण किया।