सीनियर आईएएस अफसर की शिकायत के बाद कार्रवाई, बिक्रम मजीठिया की गिरफ्तारी में निभा चुके हैं अहम भूमिका
सीनियर आईएएस अफसर की शिकायत के बाद कार्रवाई, बिक्रम मजीठिया की गिरफ्तारी में निभा चुके हैं अहम भूमिका
ख़ास ख़बर, चंडीगढ़ :
पंजाब में एक बार फिर भ्रष्टाचार को लेकर बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। अमृतसर में तैनात विजिलेंस ब्यूरो के एसएसपी लखबीर सिंह को भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते सस्पेंड कर दिया गया है। यह कार्रवाई अमृतसर में करीब ₹55 करोड़ के डेवलपमेंट टेंडर से जुड़े एक मामले को लेकर की गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मामले में पहले एक कंस्ट्रक्शन कंपनी ने शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद एक सीनियर IAS अधिकारी की ओर से भी गंभीर आरोप लगाए गए। इन्हीं शिकायतों के आधार पर सरकार ने लखबीर सिंह को सस्पेंड करने का फैसला लिया।
बताया जा रहा है कि ₹55 करोड़ के इस डेवलपमेंट प्रोजेक्ट की जांच के दौरान कई अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे। शिकायत में यह कहा गया था कि जांच प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं थी और कुछ पक्षों को जानबूझकर फायदा पहुंचाया जा रहा था। जांच की दिशा और तरीके पर सवाल उठने के बाद मामला उच्च अधिकारियों तक पहुंचा, जिसके बाद सरकार ने विजिलेंस एसएसपी पर कार्रवाई की।
हालांकि, सरकार की ओर से अब तक इस सस्पेंशन को लेकर कोई औपचारिक नोटिफिकेशन सार्वजनिक नहीं किया गया है। लेकिन प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि प्राथमिक जांच में आरोपों को गंभीर माना गया, जिसके चलते यह फैसला लिया गया। अब पूरे मामले की विस्तृत जांच की जा सकती है और आगे और भी खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
लखबीर सिंह को इसी साल मार्च 2025 में एसएसपी विजिलेंस के पद पर तैनात किया गया था। खास बात यह है कि 25 जून 2025 को शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया की गिरफ्तारी करने वाली टीम का नेतृत्व भी लखबीर सिंह ने ही किया था। उस समय उनकी कार्रवाई को सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त नीति के तौर पर देखा गया था। लेकिन करीब नौ महीने के भीतर ही उन पर खुद भ्रष्टाचार के आरोप लगना कई सवाल खड़े कर रहा है।
यह पहला मामला नहीं है जब अमृतसर में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई हुई हो। इससे पहले करीब दो महीने पहले अमृतसर रूरल के एसएसपी मनिंदर सिंह को भी सस्पेंड किया गया था। लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से यह साफ है कि पंजाब सरकार प्रशासन और पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए सख्त रुख अपनाए हुए है।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस सस्पेंशन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। विपक्षी दल जहां इसे सरकार की अंदरूनी खींचतान से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं सरकार समर्थक इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति का हिस्सा बता रहे हैं। आने वाले दिनों में जांच की रिपोर्ट और सरकार का आधिकारिक बयान इस पूरे मामले की तस्वीर और साफ कर सकता है।
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