पंजाब, हरियाणा और उत्तर भारत में अलाव, लोकगीत और पारंपरिक व्यंजनों के साथ दिखी खास रौनक
पंजाब, हरियाणा और उत्तर भारत में अलाव, लोकगीत और पारंपरिक व्यंजनों के साथ दिखी खास रौनक
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लोहड़ी का त्योहार आज पूरे उत्साह और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। यह पर्व विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा और उत्तर भारत के कई हिस्सों में नई फसल के स्वागत और मौसम के बदलाव का प्रतीक माना जाता है। मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाई जाने वाली लोहड़ी किसानों और ग्रामीण समाज के लिए खास महत्व रखती है। आज सुबह से ही गांवों और शहरों में त्योहार को लेकर चहल-पहल देखने को मिल रही है।
लोहड़ी के अवसर पर घरों, मोहल्लों और खुले मैदानों में अलाव जलाए गए, जिनके चारों ओर लोग एकत्र होकर पारंपरिक लोकगीत गाते और भांगड़ा-गिद्धा करते नजर आए। अलाव में रेवड़ी, मूंगफली, तिल, गुड़ और मक्के के दाने अर्पित किए गए, जिन्हें समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी ने इस पर्व में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
शहरों में भी लोहड़ी को लेकर खास आयोजन किए गए। कई जगहों पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ, वहीं सोसाइटी और कॉलोनियों में सामूहिक रूप से अलाव जलाकर त्योहार मनाया गया। बाजारों में रेवड़ी, गजक, तिल के लड्डू और मूंगफली की बिक्री बढ़ी रही। मिठाइयों और पारंपरिक खाद्य पदार्थों की दुकानों पर लोगों की भीड़ देखने को मिली।
लोहड़ी नवविवाहित जोड़ों और नवजात शिशुओं के लिए भी खास मानी जाती है। कई परिवारों में पहली लोहड़ी को विशेष रूप से मनाया गया, जहां रिश्तेदारों और दोस्तों ने बधाइयां दीं और उपहार भेंट किए। इस दौरान पारंपरिक गीतों के माध्यम से खुशियां साझा की गईं।
प्रशासन की ओर से भी सुरक्षा और कानून व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, ताकि लोग बिना किसी परेशानी के पर्व का आनंद उठा सकें। कुल मिलाकर, लोहड़ी का त्योहार आज सामाजिक एकता, सांस्कृतिक परंपराओं और खुशियों का संदेश देता नजर आ रहा है, जहां हर वर्ग के लोग मिलकर इस पारंपरिक पर्व को उत्सव के रूप में मना रहे हैं।
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