प्रसिद्ध रागी एवं कथा-वाचक जत्थों ने गुरु साहिबानों की शहीदी को समर्पित की श्रद्धांजलि
प्रसिद्ध रागी एवं कथा-वाचक जत्थों ने गुरु साहिबानों की शहीदी को समर्पित की श्रद्धांजलि
मुख्य पंडाल में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की पवित्र हजूरी में सजाए गए कथा एवं कीर्तन दरबार में पंथ के जाने-माने रागी और कथा-वाचक जत्थों ने हाजिरी भरकर संगतों को गुरु चरणों से जोड़ा। इस अवसर पर प्रसिद्ध कथा-वाचक एवं कीर्तन जत्थे—ज्ञानी हरजीत सिंह हरमन शाहाबाद (मारकंडा वाले), भाई गुरसेवक सिंह रंगीला (चंडीगढ़ वाले), भाई मेहताब सिंह (जालंधर वाले), बाबा हरजीत सिंह (मेहता चौक वाले), भाई गगनदीप सिंह (श्रीनगर वाले), भाई दविंदर सिंह सोढ़ी (लुधियाना वाले), भाई बलविंदर सिंह रंगीला (चंडीगढ़ वाले), भाई रविंदर सिंह (हजूरी रागी, श्री दरबार साहिब अमृतसर) और पद्मश्री भाई साहिब भाई हरजिंदर सिंह (श्रीनगर वाले) ने गुरबाणी शबद-कीर्तन और कथा के माध्यम से संगतों को गुरु परंपरा, समर्पण और शहीदी के महत्व से अवगत कराया।
दीवान के दौरान रागी जत्थों ने गुरु तेग बहादुर जी और उनके साथियों की शहीदी के ऐतिहासिक प्रसंगों को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया। कीर्तन की स्वर-लहरियों से पूरा पंडाल आध्यात्मिक वातावरण में रंग गया। संगतों ने गुरु साहिबानों की शिक्षाओं, धैर्य, त्याग और मानवता की रक्षा हेतु दिए गए बलिदानों को याद करते हुए भावपूर्ण श्रद्धा प्रकट की।
स्टेज संचालन की सेवा ज्ञानी भगवान सिंह जौहल और भाई प्रीतम सिंह ने निभाई। उन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए गुरु साहिबानों के जीवन और बलिदान को सिख इतिहास का अनमोल अध्याय बताया।
कार्यक्रम के दौरान संगतों को यह भी अवगत करवाया गया कि राज्य सरकार द्वारा शहीदी दिवस को समर्पित समागमों की यह श्रृंखला लगातार जारी रहेगी। इसी क्रम में कल, 24 नवंबर, को भी इसी मुख्य पंडाल में गुरु साहिब के जीवन एवं शिक्षाओं पर आधारित विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में काव्य-उच्चारण, ढाडी-वार, कविशरी दरबार और कथा-कीर्तन दरबार शामिल होंगे, जिनमें विख्यात कलाकार और रागी जत्थे अपनी प्रस्तुतियां देकर संगतों को गुरु-स्मरण में जोड़ेंगे।
इस प्रकार बाबा बुड्ढा दल छावनी में आज का आयोजन न केवल शहीदी दिवस की श्रद्धांजलि स्वरूप रहा, बल्कि संगतों को आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण समागम भी सिद्ध हुआ।
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