ओलंपिक मेडल से वर्ल्ड नंबर-1 तक, साइना नेहवाल का सफर रहा ऐतिहासिक
ओलंपिक मेडल से वर्ल्ड नंबर-1 तक, साइना नेहवाल का सफर रहा ऐतिहासिक
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भारतीय बैडमिंटन की दिग्गज खिलाड़ी और ओलंपिक कांस्य पदक विजेता साइना नेहवाल ने अपने शानदार करियर को अलविदा कह दिया है। उनके संन्यास की पुष्टि सोमवार को एक पॉडकास्ट के दौरान हुई, जहां उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने करियर को अपनी शर्तों पर समाप्त किया और इसके लिए किसी औपचारिक घोषणा की जरूरत नहीं समझी। साइना के इस फैसले के बाद खेल जगत से उन्हें लगातार बधाइयां और सम्मान मिल रहा है।
दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधु और भारतीय क्रिकेट टीम के दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली ने साइना के योगदान को याद करते हुए उनकी जमकर सराहना की। पीवी सिंधु ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि साइना ने भारतीय बैडमिंटन के लिए जो कुछ किया है, वह हमेशा याद रखा जाएगा और उन्हें जीवन के अगले पड़ाव के लिए शुभकामनाएं दीं। वहीं विराट कोहली ने साइना के करियर को ‘लीजेंडरी’ बताते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय बैडमिंटन को विश्व मंच पर पहचान दिलाई, जिस पर पूरा देश गर्व करता है।
साइना नेहवाल ने 2008 में जूनियर वर्ल्ड चैंपियन बनकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। उसी साल बीजिंग ओलंपिक में वह एकल बैडमिंटन के क्वार्टरफाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। 2009 में उन्होंने इंडोनेशिया ओपन जीतकर बीडब्ल्यूएफ सुपर सीरीज खिताब जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल किया। इसके बाद 2010 में उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी श्रेष्ठता साबित की।
लंदन ओलंपिक 2012 में साइना ने कांस्य पदक जीतकर भारत को बैडमिंटन में पहला ओलंपिक पदक दिलाया। साल 2015 में उन्होंने इतिहास रचते हुए वर्ल्ड नंबर-1 रैंकिंग हासिल की और प्रकाश पादुकोण के बाद ऐसा करने वाली दूसरी भारतीय खिलाड़ी बनीं। उसी वर्ष वह विश्व चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचीं, जहां उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा।
हालांकि, उनके करियर में चोटें बड़ी बाधा बनीं, खासकर रियो ओलंपिक 2016 के बाद घुटने की समस्या ने उन्हें काफी परेशान किया। इसके बावजूद उन्होंने शानदार वापसी करते हुए 2017 विश्व चैंपियनशिप में कांस्य और 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीता।
साइना नेहवाल को पद्म भूषण, पद्म श्री, खेल रत्न और अर्जुन पुरस्कार जैसे सभी प्रमुख राष्ट्रीय सम्मानों से नवाजा गया। साल 2024 में उन्होंने खुलासा किया था कि घुटनों में आर्थराइटिस और कार्टिलेज के पूरी तरह घिस जाने के कारण उन्हें खेल से दूर होने का कठिन फैसला लेना पड़ा। साइना का करियर भारतीय खेल इतिहास में हमेशा स्वर्णिम अध्याय के रूप में याद किया जाएगा।
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