राष्ट्रीय पहचान से पैरालंपिक सपने को मिली मजबूती
राष्ट्रीय पहचान से पैरालंपिक सपने को मिली मजबूती
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पीपल्स आर्मरेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (PAFI) को पैरालंपिक कमेटी ऑफ इंडिया (PCI) से आधिकारिक मान्यता मिलना भारत में पैरा-आर्मरेसलिंग के इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इस मान्यता के साथ ही पैरा-आर्मरेसलिंग को देश में एक मजबूत, संगठित और मान्यता प्राप्त खेल के रूप में आगे बढ़ने का रास्ता मिला है।
यह कदम न केवल खिलाड़ियों के लिए नई संभावनाएं खोलता है, बल्कि भारत में समावेशी खेल संस्कृति को भी मजबूती देता है। PCI से जुड़ाव के बाद अब पैरा-आर्मरेसलिंग को संरचित प्रतियोगिताओं, बेहतर प्रशिक्षण व्यवस्था और एथलीट विकास के स्पष्ट ढांचे का लाभ मिलेगा। इससे भारतीय पैरा-आर्मरेसलर्स को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाने का अवसर मिलेगा।
आर्मरेसलिंग पहले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गति पकड़ चुका है। वर्ष 2025 में दुबई में आयोजित एशियन यूथ पैरा गेम्स में इस खेल को शामिल किया जाना इसकी बढ़ती लोकप्रियता और स्वीकार्यता का संकेत है। खास बात यह है कि आर्मरेसलिंग उन गिने-चुने खेलों में शामिल है, जहां पैरा एथलीट्स मुख्य प्रतियोगिता का हिस्सा होते हैं, जिससे समानता और सम्मान का संदेश जाता है।
PAFI अब इस खेल को एशियन पैरा गेम्स और एशियन गेम्स में शामिल कराने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रही है। PCI की मान्यता से इन प्रयासों को नई ताकत मिली है और भविष्य में पैरालंपिक गेम्स में आर्मरेसलिंग को शामिल कराने का लक्ष्य और भी स्पष्ट हो गया है।
पैरालंपिक कमेटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष देवेंद्र झाझरिया ने PAFI को बधाई देते हुए कहा कि यह मान्यता पैरा एथलीट्स के लिए आर्मरेसलिंग को बढ़ावा देने में फेडरेशन की निरंतर मेहनत का परिणाम है। उन्होंने PAFI के समावेशी दृष्टिकोण और पैरा एथलीट्स को सक्षम खिलाड़ियों के समान मंच देने की सराहना की।
भारत में PAFI और प्रो पंजा लीग ने मिलकर पैरा-आर्मरेसलिंग के लिए एक मजबूत घरेलू ढांचा तैयार किया है। प्रो पंजा लीग में पुरुष, महिला और पैरा एथलीट्स एक ही मंच पर मुकाबला करते हैं और रैंकिंग के आधार पर पैरा खिलाड़ियों को भी समान भुगतान दिया जाता है।
PAFI की अध्यक्ष प्रीति झंगियानी ने इसे फेडरेशन के लिए गर्व का क्षण बताया और कहा कि यह मान्यता पारदर्शी प्रशासन, खिलाड़ी कल्याण और समावेशी विकास की दिशा में उनके संकल्प को और मजबूत करती है। यह उपलब्धि भारतीय पैरा-आर्मरेसलिंग को वैश्विक मंच तक पहुंचाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
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