इस मामले में कोतवाली थाना अमृतसर में एफआईआर दर्ज की गई, जिसमें एसजीपीसी के पूर्व चीफ सेक्रेटरी रूप सिंह सहित 16 लोगों को आरोपी बनाया गया।
इस मामले में कोतवाली थाना अमृतसर में एफआईआर दर्ज की गई, जिसमें एसजीपीसी के पूर्व चीफ सेक्रेटरी रूप सिंह सहित 16 लोगों को आरोपी बनाया गया।
खबर खास, अमृतसर/ चंडीगढ़ :
पंजाब के अमृतसर में श्री गुरु ग्रंथ साहिब के 328 पावन स्वरूपों के गबन और बेअदबी मामले में पंजाब पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एसजीपीसी के पूर्व आंतरिक ऑडिटर व सुखबीर बादल के करीबी सतिंदर सिंह कोहली को गिरफ्तार कर लिया गया है। यह मामला 2020 में तब चर्चा में आया जब अकाल तख्त की ओर से गठित जांच समिति ने कोहली की लापरवाही पकड़ी थी। पुलिस ने हाल ही में मामला दर्ज किया था और इसपर सीएम भगवंत मान का भी बयान सामने आया था। सीएम ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी यानि एसजीपीसी पर भी सवाल उठाए थे।
2009 में एसएस कोहली एंड एसोसिएट्स फर्म को एसजीपीसी की ओर से आंतरिक ऑडिट, खातों के कंप्यूटरीकरण और नियंत्रण प्रणाली के लिए 3.5 लाख रुपए मासिक भुगतान किया जा रहा था।
लेकिन अकाल तख्त द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट में पाया गया था कि एसएस कोहली एंड एसोसिएट्स फर्म ने केवल एक काम किया था और उसके लिए चार कामों के लिए भुगतान लिया। जिससे पावन स्वरूप के गबन रोकने में चूक हुई। 2020 में एसजीपीसी ने उनकी सेवाएं समाप्त कर दीं और 75% भुगतान की वसूली का प्रस्ताव पारित किया था।
सतिंदर कोहली सुखबीर सिंह बादल के करीबी चार्टर्ड अकाउंटेंट में शुमार हैं जो उनके निजी और एसजीपीसी खातों को संभालते रहे। यही कोहली 2003 में भी सुर्खियों में तब आए जब पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने बादल परिवार के काले धन को सफेद करने के आरोप में उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे।
गौर रहे कि बीते साल 29 सितंबर को चंडीगढ़ में सीएम मान ने 328 पावन स्वरूपों के गायब होने के मामले में कहा था कि उनके पास संस्थाओं की शिकायत आई थी। इसलिए मामला दर्ज किया था। इससे पहले एसजीपीसी ने ही कानूनी कार्रवाई के प्रस्ताव पास किए। अब केस दर्ज होने के बाद फंसने लगे तो अब कह रहे हैं कि यह अंदरूनी मामला है। सरकार दखल न दे। सरकार कानूनी कार्रवाई करेगी।
उल्लेखनीय है कि 328 पावन स्वरूपों का मामला अमृतसर से जुड़ा है, जहां गुरु ग्रंथ साहिब के 328 पवित्र स्वरूपों के गुम होने और उनकी संभावित बेअदबी का आरोप लगा। संगत की ओर से लंबे समय से शिकायतें की जा रही थीं कि इन स्वरूपों का सही रिकॉर्ड, संरक्षण और मर्यादा के अनुसार प्रबंधन नहीं किया गया। मामले की जांच के बाद कोतवाली थाना अमृतसर में एफआईआर दर्ज की गई, जिसमें एसजीपीसी के पूर्व चीफ सेक्रेटरी रूप सिंह सहित 16 लोगों को आरोपी बनाया गया।
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