नए श्रम कानून देश में लाएंगे क्रांतिकारी बदलाव
नए श्रम कानून देश में लाएंगे क्रांतिकारी बदलाव
खबर खास, चंडीगढ़ :
चंडीगढ़ में नए श्रम कानूनों के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से पीएचडी चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा विशेष सत्र का आयोजन किया गया। जिसमें कानूनी विशेषज्ञ, औद्योगिक प्रतिनिधियों, प्रोफेशन्लस और कारपोरेट प्रतिनिधियों ने भाग लेकर नए श्रम कानूनों पर अपनी राय व्यक्त की।
पीएचडी चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री की सीनियर रीजनल डायरेक्टर, सुश्री भारती सूद ने इस बात पर ज़ोर दिया कि जैसे-जैसे भारत ग्लोबल स्तर पर प्रतियोगी एवं मजबूत आर्थिक शक्ति बनने की ओर बढ़ रहा है, वैसे-वैसे काम,रोजगार और औद्योगिक क्षेत्रों में गवर्नेंस जरूरी हो गया है। उन्होंने बताया कि नए श्रम कानूनों का आना आजादी के बाद से भारत के लेबर लॉ फ्रेमवर्क में सकारात्मक सुधार है।
पीएचडीसीसीआई हरियाणा चेप्टर के को-चेयर लोकेश जैन ने नए श्रम कानूनों के
मौजूदा कानूनों को रैशनलाइज़ और मज़बूत करने और आसान बनाने, वर्कर वैलफेयर को मज़बूत करने और एक बैलेंस्ड और ग्रोथ-ओरिएंटेड इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम को बढ़ावा देने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि इसे असरदार तरीके से लागू करने के लिए सभी हित धारकों में पारदर्शिता व जागरूकता जरूरी है।
पीएचडीसीसीआई की रीजनल एनसीएलटी और कॉर्पोरेट अफेयर्स कमेटी के कन्वीनर,सीएस राहुल जोगी ने कहा कि इस सत्र का उद्देश्य नए श्रम कानून, उनके कानूनी पहलू और अलग-अलग सेक्टर के कर्मचारियों,एचआर प्रोफेशनल्स और संस्थाओं पर उनके असर के बारे में प्रैक्टिकल और एक्शन लेने लायक जानकारी देना था।
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता जितेंद्र गुप्ता ने मजदूरी संहिता के बारे में कहा कि वेज से जुड़े कानूनों को रेशनलाइज़ और मज़बूत करने पर जोर दिया। ग्रांट थॉर्नटन के एसोसिएट डायरेक्टर, दीपक भारद्वाज ने इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड के माध्यम से ट्रेड यूनियनों, स्टैंडिंग ऑर्डर्स, औद्योगिक विवादों,हड़तालों ले ऑफको कंट्रोल करने वाले रेगुलेशंस से जुड़े संशोधनों के बारे में बताया।
इस अवसर पर सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता एस. के. शर्मा, लेखक और एचआर लीगल एक्सपर्ट प्रभजीत गिल समेत कई विशेषज्ञों ने अपनी राय व्यक्त की। सत्र का समापन पीएचडीसीसीआई के रेजिडेंट निदेशक गुरदर्शन अग्रवाल द्वारा आए हुए अतिथियों का आभार व्यक्त करने के साथ हुआ।
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