YRF ने पेड पीआर के दावों को नकारा, कहा– फिल्म का प्रमोशन पूरी तरह नैतिक और पारदर्शी
YRF ने पेड पीआर के दावों को नकारा, कहा– फिल्म का प्रमोशन पूरी तरह नैतिक और पारदर्शी
ख़बर ख़ास, फिल्म :
रानी मुखर्जी अभिनीत आगामी फिल्म ‘मर्दानी 3’ के निर्माताओं ने उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें कहा गया था कि फिल्म के प्रचार के लिए दिल्ली में लापता लोगों के मामलों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया। यह विवाद तब सामने आया, जब दिल्ली पुलिस ने लापता लड़कियों की कथित बढ़ती संख्या को लेकर फैलाए जा रहे प्रचार पर सवाल उठाए।
शुक्रवार को दिल्ली पुलिस ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा कि कुछ सुरागों की जांच के बाद यह सामने आया है कि दिल्ली में लापता लड़कियों की संख्या को लेकर बनाया गया माहौल पेड प्रमोशन के जरिए फैलाया जा रहा है। पुलिस ने स्पष्ट चेतावनी दी कि आर्थिक या प्रचार लाभ के लिए डर और घबराहट फैलाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए यश राज फिल्म्स (YRF) के प्रवक्ता ने IANS से कहा कि YRF एक 50 साल पुरानी कंपनी है, जिसकी नींव नैतिकता और पारदर्शिता के मूल सिद्धांतों पर रखी गई है। प्रवक्ता ने सोशल मीडिया पर चल रहे उन दावों को पूरी तरह खारिज किया, जिनमें कहा गया कि ‘मर्दानी 3’ के प्रचार अभियान में जानबूझकर इस संवेदनशील मुद्दे को सनसनीखेज तरीके से पेश किया गया। बयान में यह भी कहा गया कि कंपनी को जांच एजेंसियों पर पूरा भरोसा है और समय आने पर सभी तथ्य और सच्चाई सामने आ जाएगी।
इस विवाद के बीच दिल्ली में लापता लोगों से जुड़े आंकड़ों पर भी चर्चा तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस वर्ष अब तक 807 लोगों के लापता होने की सूचना दर्ज की गई है, यानी औसतन रोज़ाना करीब 54 मामले। इनमें 509 महिलाएं और लड़कियां तथा 298 पुरुष शामिल हैं। इन मामलों में 191 नाबालिग और 616 वयस्क बताए गए हैं। पुलिस ने इस अवधि में 235 लोगों को ढूंढ लिया है, जबकि 572 मामले अब भी लंबित हैं।
पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2025 में दिल्ली में 24,500 से अधिक लोग लापता हुए थे। इनमें महिलाओं की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत से ज्यादा थी और साल के अंत तक 9,000 से अधिक मामले सुलझ नहीं पाए थे।
हालांकि, बढ़ती चिंताओं के बीच दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि 2026 में लापता मामलों में कोई असामान्य वृद्धि नहीं हुई है। पुलिस के अनुसार, हर महीने औसतन लगभग 2,000 मामले सामने आते हैं और कुल रुझान पिछले वर्षों की तुलना में स्थिर बना हुआ है।
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