पूर्व भारतीय नंबर-1 बोले—ओलंपिक मंच के साथ भागीदारी, तकनीक और जमीनी स्तर पर विकास जरूरी
पूर्व भारतीय नंबर-1 बोले—ओलंपिक मंच के साथ भागीदारी, तकनीक और जमीनी स्तर पर विकास जरूरी
ख़बर ख़ास, खेल :
पूर्व भारतीय नंबर-1 Saurav Ghosal ने स्क्वैश को 2028 Summer Olympics में शामिल किए जाने को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है। उन्होंने कहा कि स्क्वैश खिलाड़ी दुनिया के बेहतरीन एथलीट्स में शामिल हैं और उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए आखिरकार सबसे बड़ा मंच मिल गया है।
हालांकि, घोषाल ने यह भी स्पष्ट किया कि सिर्फ ओलंपिक में शामिल होना ही काफी नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर स्क्वैश को लंबे समय तक इस मंच पर बने रहना है तो दुनिया भर में इसकी भागीदारी और दर्शकों की संख्या को तेजी से बढ़ाना होगा। आज के दौर में स्क्वैश केवल अन्य खेलों से ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया, वीडियो गेम्स और अन्य मनोरंजन माध्यमों से भी प्रतिस्पर्धा कर रहा है।
घोषाल ने खेल के विकास के लिए कुछ अहम कदमों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्क्वैश को अधिक से अधिक टीवी पर दिखाया जाना चाहिए, इसे स्कूल स्तर पर शामिल किया जाना चाहिए और वर्ल्ड प्रीमियर स्क्वैश जैसे नए और आकर्षक फॉर्मेट्स के जरिए लोगों को जोड़ा जाना चाहिए।
उन्होंने मिस्र (Egypt) का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां हर बच्चे को स्क्वैश के बारे में जानकारी होती है और उन्हें कम उम्र में ही शीर्ष खिलाड़ियों को देखने और सीखने का मौका मिलता है। साथ ही, पूर्व खिलाड़ियों को कोच और एडमिनिस्ट्रेटर के रूप में जोड़े रखने से वहां खेल का स्तर लगातार ऊंचा बना हुआ है।
भारत के संदर्भ में घोषाल ने कहा कि यहां प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन गुणवत्ता और संख्या दोनों पर समान रूप से काम करने की जरूरत है। अंतरराष्ट्रीय कोचों के साथ सहयोग और तकनीक के बेहतर इस्तेमाल से इस खेल को और मजबूत बनाया जा सकता है।
उन्होंने AI आधारित नए फॉर्मेट्स का भी समर्थन किया, जिन्हें उन्होंने पारंपरिक खेल का पूरक बताया। उनके अनुसार, ये पहल न केवल दर्शकों को आकर्षित करती हैं बल्कि खिलाड़ियों के कौशल को भी निखारती हैं।
अपने करियर के बाद के जीवन पर बात करते हुए घोषाल ने कहा कि वह अभी भी इस बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं और नई चुनौतियों को स्वीकार कर रहे हैं।
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