पता लगने से बचने के लिए आईईडी बनाने में प्रयुक्त धातु की केसिंग की जगह इस्तेमाल किया गया पीवीसी पाइप : डीजीपी आरोपी एन्क्रिप्टेड मोबाइए ऐप के जरिए विदेशी हैंडलर के संपर्क में था
पता लगने से बचने के लिए आईईडी बनाने में प्रयुक्त धातु की केसिंग की जगह इस्तेमाल किया गया पीवीसी पाइप : डीजीपी आरोपी एन्क्रिप्टेड मोबाइए ऐप के जरिए विदेशी हैंडलर के संपर्क में था
खबर खास, चंडीगढ़/अमृतसर :
खुफिया जानकारी के आधार पर कार्रवाई करते हुए, स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल (एसएसओसी) अमृतसर ने एक आरोपी को आरडीएक्स आधारित इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) सहित गिरफ्तार कर पाकिस्तान की आईएसआई समर्थित आतंकी साजिश को नाकाम कर दिया है। यह जानकारी आज यहां पुलिस महानिदेशक पंजाब गौरव यादव ने दी।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान राहुल कुमार उर्फ गज्जू, निवासी चमरंग रोड, अमृतसर के रूप में हुई है। वह अमृतसर के एक सैलून में सहायक के रूप में काम करता है।
डीजीपी ने बताया कि प्रारंभिक जांच के अनुसार गिरफ्तार आरोपी पाकिस्तान स्थित हैंडलरों के निर्देश पर काम करने वाला एक विदेशी हैंडलर के संपर्क में था। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपी राहुल ने अपने विदेशी हैंडलर के निर्देश पर शहर के बाहरी इलाके में एक निर्धारित स्थान से खेप प्राप्त की थी। उन्होंने आगे कहा कि डिवाइस को पीवीसी पाइप की केसिंग में छिपाया गया था ताकि इसका पता न चल सके। डीजीपी ने कहा कि आईईडी की डिलीवरी के स्रोत का पता लगाने के लिए जांच जारी है।
इस ऑपरेशन के बारे में जानकारी देते हुए एआईजी एसएसओसी अमृतसर सुखमिंदर सिंह मान ने बताया कि पाकिस्तान से आईईडी वाली खेप भेजे जाने की विश्वसनीय खुफिया जानकारी मिलने पर पुलिस टीमों ने एक ऑपरेशन चलाया और संदिग्ध राहुल उर्फ गज्जू को आईईडी सहित गिरफ्तार कर लिया।
एआईजी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी 2022 में अपने विदेशी हैंडलर के पंजाब दौरे के दौरान उसके संपर्क में आया था और दोनों एन्क्रिप्टेड मोबाइल ऐप्स के माध्यम से एक-दूसरे से संपर्क करते थे। उन्होंने कहा कि विदेशी हैंडलर ने शुरू में राहुल को काम सौंपने से पहले उसके खर्चों के लिए छोटी-छोटी रकम देकर उसे जाल में फंसाया। उन्होंने कहा कि इस मामले की आगे की जांच जारी है।
इस संबंध में, थाना एसएसओसी अमृतसर में दिनांक 09.02.2026 को एफआईआर नंबर 08 विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 3, 4 और 5, आर्म्स एक्ट की धारा 25 तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 111 और 61(2) के तहत दर्ज की गई है।
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